भोपाल, मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश सरकार ने वन विभाग के फील्ड में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। वन विभाग ने जंगल और मैदानी क्षेत्रों में ड्यूटी करने वाले रेंजर, डिप्टी रेंजर, वनपाल और वनरक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी है। यह फैसला वनकर्मियों की ड्यूटी की प्रकृति और फील्ड में काम करने की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अब निर्धारित फील्ड स्टाफ को ई-अटेंडेंस दर्ज करने की बाध्यता नहीं होगी।
फील्ड में रहने वाले वनकर्मियों को मिली राहत
वन विभाग के इस फैसले से जंगलों और दूरदराज के क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को राहत मिलेगी। ऐसे वनकर्मियों की ड्यूटी का बड़ा हिस्सा कार्यालय के बजाय वन क्षेत्रों और अन्य फील्ड लोकेशन पर होता है। अलग-अलग स्थानों पर लगातार गश्त और निरीक्षण के कारण ई-अटेंडेंस दर्ज करने में व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती थीं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए विभाग ने निर्धारित फील्ड अमले को इस व्यवस्था से बाहर कर दिया है।
रेंजर से वनरक्षक तक को छूट
ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता से छूट पाने वाले फील्ड स्टाफ में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- रेंजर
- डिप्टी रेंजर
- वनपाल
- वनरक्षक
इन कर्मचारियों को अब अपनी नियमित फील्ड ड्यूटी के दौरान ई-अटेंडेंस दर्ज करने की बाध्यता नहीं होगी।
अन्य कर्मचारियों के लिए ई-अटेंडेंस रहेगी लागू
हालांकि, वन विभाग ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को ई-अटेंडेंस से छूट नहीं दी है। विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी पहले की तरह ई-अटेंडेंस व्यवस्था के तहत ही रहेंगे। यानी यह राहत केवल उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए है, जिनकी ड्यूटी निर्धारित रूप से फील्ड और वन क्षेत्रों में रहती है।
ड्यूटी की प्रकृति को देखते हुए लिया गया फैसला
वन विभाग के अनुसार, फील्ड कर्मचारियों की कार्यप्रणाली अन्य कार्यालय आधारित कर्मचारियों से अलग होती है। वनकर्मियों को जंगलों में लगातार भ्रमण, गश्त और अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में उनकी वास्तविक कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को खत्म करने का निर्णय लिया गया है। इससे फील्ड स्टाफ को अपनी मुख्य जिम्मेदारियों पर ज्यादा ध्यान देने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।