मध्य प्रदेश के पन्ना नगर में हुई कुछ घंटों की बारिश ने जिला प्रशासन और नगर पालिका परिषद की मानसून तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। नगर के कई वार्डों, स्कूलों, जिला अस्पताल के आसपास और प्रमुख सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों का आरोप है कि वर्षों से जल निकासी की समस्या बनी हुई है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
स्कूल, अस्पताल और वार्डों में भरा पानी, लोगों का आवागमन प्रभावित
बारिश के बाद पन्ना नगर के कई इलाकों में पानी भर जाने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। जिला अस्पताल परिसर और उसके आसपास जलभराव होने से मरीजों एवं उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं कई स्कूलों के आसपास भी पानी जमा हो गया, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। नगर के अधिकांश वार्डों में सड़कें तालाब जैसी नजर आईं और नालियों का पानी सड़कों पर बहता दिखाई दिया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष मानसून के दौरान यही हालात बनते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान नहीं कर पा रहा है।
तीन साल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, जिम्मेदारों की कार्यशैली पर नाराजगी
बारिश के बाद उत्पन्न हालात को लेकर नगर पालिका और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों की तैयारी की गई होती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों का आरोप है कि नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी जमीनी स्तर पर सक्रिय दिखाई नहीं दिए, जबकि कई वार्डों में घंटों तक पानी भरा रहा। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल निकासी की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए, नियमित रूप से नालों की सफाई कराई जाए और मानसून के दौरान आपातकालीन व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।