आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की कालाष्टमी का व्रत आज, 7 जुलाई 2026 (मंगलवार) को रखा जा रहा है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप बाबा काल भैरव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और प्रिय भोग अर्पित करने से भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
क्यों खास है आषाढ़ कालाष्टमी?
हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है, लेकिन आषाढ़ माह की कालाष्टमी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन बाबा काल भैरव की पूजा करने से साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्राप्त होती है। बाबा काल भैरव को काशी का कोतवाल और न्याय का देवता भी माना जाता है, जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
बाबा काल भैरव को क्या अर्पित करें?
उड़द की दाल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा काल भैरव को काली उड़द अत्यंत प्रिय है। कालाष्टमी पर उड़द की दाल या उससे बने व्यंजनों का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
जलेबी
काल भैरव को जलेबी का भोग भी विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। कई मंदिरों में इस दिन बाबा को जलेबी चढ़ाकर प्रसाद भक्तों में वितरित किया जाता है।
सरसों का तेल
पूजा के दौरान सरसों के तेल का दीपक जलाना और तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे शनि और राहु से जुड़े दोषों का प्रभाव कम होता है।
नारियल और मिठाइयां
नारियल, बताशे, लड्डू या अन्य सात्विक मिठाइयों का भोग लगाने से परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
काले तिल
कालाष्टमी पर काले तिल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक मजबूती मिलती है।
कालाष्टमी पर कैसे करें पूजा?
सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव तथा बाबा काल भैरव का ध्यान करें। पूजा स्थल पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं, धूप-अगरबत्ती अर्पित करें और फूल, अक्षत, रोली के साथ अपनी श्रद्धा अनुसार भोग चढ़ाएं। इसके बाद काल भैरव चालीसा या काल भैरव अष्टक का पाठ करें और अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और मंगल की कामना करें।
कालाष्टमी के दिन क्या करना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। साथ ही काले कुत्ते को रोटी, दूध या मीठी रोटी खिलाने की परंपरा भी है, क्योंकि कुत्ते को बाबा काल भैरव का वाहन माना जाता है।
धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन विधि-विधान से बाबा काल भैरव की पूजा करने से भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा होती है। साथ ही जीवन में सुख, समृद्धि, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।