खंडवा/ओंकारेश्वर: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में 18 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रस्तावित दौरा होने जा रहा है। यदि कार्यक्रम तय समय पर संपन्न होता है, तो वह राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ओंकारेश्वर पहुंचने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बन जाएंगी। इससे पहले वर्ष 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ने ओंकारेश्वर का दौरा किया था। राष्ट्रपति के संभावित आगमन को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ओंकारेश्वर पहुंचने वाली दूसरी राष्ट्रपति होंगी द्रौपदी मुर्मू
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के इतिहास में यह दौरा विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ने यहां पहुंचकर आदि गुरु शंकराचार्य के गुरु गोविंद भगवत्पादाचार्य गुफा के जीर्णोद्धार कार्य का लोकार्पण किया था। अब लगभग चार दशक बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रस्तावित दौरा इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाएगा।
शासन और प्रशासन ने शुरू की व्यापक तैयारियां
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए सुरक्षा, आवागमन, दर्शन व्यवस्था, हेलिपैड, रात्रि विश्राम और प्रोटोकॉल से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने शुक्रवार को ओंकारेश्वर पहुंचकर मंदिर परिसर, सुरक्षा मार्ग और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मौजूदगी की संभावना
राष्ट्रपति के स्वागत कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति संभावित मानी जा रही है। प्रशासन इस दौरे को पूरी गरिमा और सुरक्षा के साथ संपन्न कराने में जुटा हुआ है।
प्रधानमंत्री रहते किसी भी पीएम ने नहीं किए ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन
ओंकारेश्वर का एक रोचक तथ्य यह भी है कि अब तक कोई भी प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान यहां ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए नहीं पहुंचा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ओंकारेश्वर बांध के भूमि पूजन कार्यक्रम में जरूर आए थे, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से ज्योतिर्लिंग मंदिर तक नहीं जा सके थे। वहीं वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्तावित दौरा भारी बारिश और नर्मदा में आई बाढ़ के कारण स्थगित करना पड़ा था।
ओंकारेश्वर को वैश्विक आध्यात्मिक पहचान दिलाने का अवसर
नर्मदा नदी के मध्य स्थित ओंकारेश्वर केवल 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक नहीं, बल्कि आदि गुरु शंकराचार्य की साधना स्थली और अद्वैत दर्शन का प्रमुख केंद्र भी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन इस धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला माना जा रहा है।