ग्वालियर । शहर में प्रस्तावित ऋषि गालव विश्वविद्यालय को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शिवपुरी लिंक रोड स्थित शीतला माता मंदिर परिसर में 4 मई को भव्य भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस विश्वविद्यालय को क्षेत्र की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह संस्थान भविष्य में ग्वालियर को शैक्षणिक हब के रूप में नई पहचान दिला सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे भूमिपूजन
भूमिपूजन समारोह में मुख्यमंत्री मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम सुबह साढ़े 9 बजे शुरू होगा, जिसमें प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोग मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। आयोजन को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
कई वरिष्ठ मंत्री और संघ पदाधिकारी रहेंगे मौजूद
इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार और जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट भी शामिल होंगे। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश सोनी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। मध्य भारत शिक्षा समिति के पदाधिकारियों के अनुसार विश्वविद्यालय की स्थापना लंबे समय से चल रही शैक्षणिक दृष्टि और सामाजिक प्रयासों का परिणाम है।
110 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा विश्वविद्यालय
ऋषि गालव विश्वविद्यालय परियोजना पर लगभग 110 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा, शोध और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।
ग्वालियर के छात्रों को मिलेगा बड़ा लाभ
विश्वविद्यालय बनने से ग्वालियर और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र में रोजगार, शैक्षणिक गतिविधियों और शोध कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा संस्थान विकसित होने से विद्यार्थियों को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के नए विकल्प भी मिल सकेंगे।
शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत का बनेगा नया केंद्र
ऋषि गालव विश्वविद्यालय का नाम भारतीय ऋषि परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसे केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के संगम के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय ग्वालियर की शैक्षणिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।