सागर जिले के बंडा तहसील में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में राज्य शासन ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है।हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस विष्णु प्रताप सिंह चौहान को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। आयोग घटना से जुड़े तथ्यों, परिस्थितियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगा।आयोग का मुख्यालय सागर में रखा गया है और उसे आदेश जारी होने की तारीख से तीन महीने के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य शासन को सौंपनी होगी।
तीन बिंदुओं पर होगी पूरी जांच
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक आयोग के लिए जांच के तीन प्रमुख बिंदु तय किए गए हैं।
1. मौत और अस्वस्थता की वजह क्या थी?
जांच का पहला बिंदु जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों और लोगों के अस्वस्थ होने की घटना के कारण का पता लगाना है।
आयोग घटना के स्वरूप, उससे जुड़ी परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण करेगा। इसके बाद घटना के कारणों का तथ्यात्मक निर्धारण करते हुए शासन को इसकी जानकारी देगा।
2. अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी की जांच
दूसरे बिंदु में संबंधित क्षेत्र के आबकारी अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाएगी।आयोग यह देखेगा कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने निर्धारित दायित्वों का किस तरह निर्वहन किया और इस मामले से जुड़े उनके कार्यों की स्थिति क्या रही।
3. भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के उपाय
जांच का तीसरा बिंदु भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने से संबंधित है।आयोग जहरीली शराब जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण, निगरानी और रोकथाम के लिए आवश्यक उपायों की सिफारिशें भी करेगा। इससे सरकार को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलेगी।
तीन महीने में सरकार को सौंपनी होगी रिपोर्ट
राज्य शासन के आदेश के अनुसार आयोग को आदेश जारी होने की तारीख से तीन माह के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंपी जाएगी।आयोग का मुख्यालय सागर में होने के कारण घटना से जुड़े स्थानीय तथ्यों और संबंधित पक्षों की जानकारी जुटाने के लिए जांच का केंद्र भी सागर ही रहेगा।
सरकार के फैसले से जांच का दायरा स्पष्ट
एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग के गठन के साथ ही सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच केवल जहरीली शराब से हुई मौतों के कारणों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।अब आयोग की जांच के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।