भोपाल। राजधानी भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में एक बार फिर जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। ट्विशा के परिजनों के अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि मामले की जांच से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज, जो पुलिस केस डायरी का हिस्सा थे, कथित तौर पर सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह तक पहुंच गए थे।
लिगेचर जब्ती प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
अधिवक्ता के अनुसार, 13 मई को कटारा हिल्स थाना पुलिस ने बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित ट्विशा के ससुराल से फंदे में इस्तेमाल किए गए लिगेचर (बेल्ट) समेत अन्य सामान जब्त किया था। हालांकि, लिगेचर की जब्ती से जुड़े दस्तावेजों पर गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के हस्ताक्षर नहीं लिए गए। उनका कहना है कि इससे भविष्य में अदालत में साक्ष्यों को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है।
पुलिस डायरी के दस्तावेज कोर्ट तक कैसे पहुंचे?
अंकुर पाण्डेय ने कहा कि गिरिबाला सिंह ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका के दौरान उच्च न्यायालय में जो दस्तावेज पेश किए, उनमें वह जब्ती दस्तावेज भी शामिल था, जो विवेचना और केस डायरी का हिस्सा माना जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे दस्तावेज आरोपी पक्ष तक कैसे पहुंचे, जबकि इन्हें केवल पुलिस या जांच एजेंसी ही अदालत में प्रस्तुत कर सकती है।
'जब आरोपी ही नहीं थे, तब दस्तावेज मांगने का अधिकार कैसे?'
परिजनों के अधिवक्ता का कहना है कि 13 मई को जब लिगेचर जब्ती की कार्रवाई हुई थी, उस समय गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को आरोपी नहीं बनाया गया था। ऐसे में कानूनी रूप से उन्हें इन दस्तावेजों को प्राप्त करने का अधिकार नहीं था। उनका आरोप है कि इससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
पहले भी सामने आ चुकी हैं जांच में लापरवाही की बातें
इससे पहले भी फंदे में इस्तेमाल किए गए लिगेचर को पोस्टमार्टम के दौरान एम्स की टीम को समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने का मामला सामने आया था। सीबीआई ने भी इस संबंध में भोपाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई थी।
सीबीआई के पास है मामले की जांच
ट्विशा शर्मा केस की जांच फिलहाल सीबीआई के पास है। नए आरोपों के सामने आने के बाद एक बार फिर मामले की जांच प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।