इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को पद्मश्री उज्ज्वल निकम अपने जीवन, संघर्ष और देश के चर्चित आपराधिक मुकदमों से जुड़े अनुभव साझा करेंगे। संस्था सार्थक की ओर से आयोजित ‘द मैन बिहाइंड द वर्डिक्ट’ कार्यक्रम में 26/11 मुंबई आतंकी हमला, 1993 मुंबई बम धमाके और अन्य चर्चित मामलों में अभियोजन पक्ष की भूमिका पर चर्चा होगी। कार्यक्रम शाम 4:30 बजे रविंद्र नाट्य गृह, आरएनटी मार्ग पर आयोजित किया जाएगा। यह संवाद उनकी जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘प्रहार : द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ की 16 अक्टूबर को निर्धारित रिलीज से एक दिन पहले हो रहा है।
26/11 आतंकी हमले के मुकदमे से मिली देशभर में पहचान
पद्मश्री उज्ज्वल निकम का नाम मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले के मुकदमे के साथ प्रमुखता से जुड़ा है। इस मामले में उन्होंने अजमल कसाब के खिलाफ अभियोजन पक्ष की पैरवी की थी। यह मुकदमा देश की सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। इसके अलावा 1993 के मुंबई बम धमाकों और 2003 के गेटवे ऑफ इंडिया व झवेरी बाजार बम धमाकों जैसे मामलों में भी उनके कानूनी अनुभवों का उल्लेख किया जाता है।
फिल्म ‘प्रहार’ की रिलीज से पहले होगा विशेष संवाद
16 अक्टूबर को उज्ज्वल निकम के जीवन और उनके चर्चित कानूनी सफर पर आधारित फिल्म ‘प्रहार : द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ रिलीज होने वाली है। फिल्म में अभिनेता राजकुमार राव उनकी भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म की रिलीज से ठीक एक दिन पहले होने वाला यह संवाद लोगों को उनके पेशेवर जीवन, कानूनी चुनौतियों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े अनुभवों को सीधे सुनने का अवसर देगा।
‘द मैन बिहाइंड द वर्डिक्ट’ में साझा करेंगे संघर्ष की कहानी
संस्था सार्थक के आयोजक दीपक जैन (टीनू) के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को प्रेरित करने वाले व्यक्तित्वों के अनुभवों को लोगों तक पहुंचाना है। उज्ज्वल निकम अपने पेशेवर सफर, संवेदनशील मामलों में अभियोजन की जिम्मेदारी, साक्ष्यों की अहमियत और न्याय तक पहुंचने की प्रक्रिया पर अपने विचार साझा करेंगे। आयोजकों का मानना है कि यह संवाद युवाओं, अधिवक्ताओं और विधि के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा।
गुलशन कुमार हत्याकांड समेत कई चर्चित मामलों का अनुभव
उज्ज्वल निकम के कानूनी सफर में गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड, खैरलांजी हत्याकांड और कल्याण लोकल ट्रेन बम धमाके जैसे चर्चित मामलों का भी उल्लेख किया जाता है। इन मामलों में अलग-अलग कानूनी और सामाजिक चुनौतियां सामने आईं। ऐसे प्रकरणों के अनुभवों के जरिए गवाहों, दस्तावेजों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और अदालत में तथ्यों की प्रस्तुति की भूमिका को समझने का अवसर मिलेगा।
कानून और न्याय व्यवस्था पर होगी चर्चा
कार्यक्रम केवल चर्चित मुकदमों की घटनाओं तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें कानून के शासन, अभियोजन पक्ष की जिम्मेदारी और न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की भूमिका जैसे विषयों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। आयोजक दीपक जैन ने इंदौर के नागरिकों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों और युवाओं से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।