सागर. मध्य प्रदेश के सागर जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी व्यवस्था में कथित बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। वेयरहाउस पहुंची सैकड़ों बोरियों में गेहूं की जगह मिट्टी और खराब सामग्री मिलने से खरीदी, भंडारण और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वेयरहाउस पहुंचते ही सामने आया चौंकाने वाला मामला
सागर जिले के गंभीरिया स्थित लक्ष्मी नगर के श्री देव प्रभा वेयरहाउस में गेहूं की खेप पहुंचने के बाद एक ऐसी अनियमितता सामने आई जिसने प्रशासनिक तंत्र को सकते में डाल दिया। समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं की लगभग 600 बोरियां गोदाम पहुंचीं, लेकिन जांच में कई बोरियों में गेहूं की जगह मिट्टी और अमानक सामग्री भरी मिली। मामला उजागर होते ही प्रशासन और संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया।
कर्मचारियों के शक ने खोला बड़ा राज
जानकारी के अनुसार हर्षिता स्व सहायता समूह केंद्र से ट्रक क्रमांक एमपी 15 जेडआर 9190 में भरकर गेहूं की बोरियां वेयरहाउस भेजी गई थीं। ट्रक से माल उतारने का काम जारी था और करीब 100 से अधिक बोरियां गोदाम में रखी जा चुकी थीं। इसी दौरान कर्मचारियों को कुछ बोरियों के वजन और गुणवत्ता पर संदेह हुआ। जब बोरियां खोलकर देखी गईं तो उनमें बड़ी मात्रा में मिट्टी भरी मिली। कुछ बोरियों में नाममात्र का गेहूं था जबकि अधिकांश हिस्सा मिट्टी और खराब सामग्री से भरा हुआ पाया गया।
समय रहते पकड़ी गई गड़बड़ी
यदि कर्मचारियों ने सतर्कता नहीं दिखाई होती तो पूरी खेप गोदाम में जमा हो जाती और यह मामला शायद कभी सामने नहीं आता। गड़बड़ी सामने आने के बाद तुरंत अधिकारियों को सूचना दी गई और उतारी जा चुकी बोरियों को दोबारा ट्रक में लोड कर वापस भेज दिया गया। इस कार्रवाई ने संभावित बड़े नुकसान और रिकॉर्ड में गलत भंडारण दर्ज होने से बचा लिया।
भ्रष्टाचार की आशंका ने बढ़ाई चिंता
सूत्रों के अनुसार मामला केवल अमानक गेहूं का नहीं बल्कि संगठित स्तर की हेराफेरी का संकेत देता है। आशंका जताई जा रही है कि खरीदी केंद्र पर अच्छी गुणवत्ता का गेहूं खरीदा गया होगा, लेकिन बाद में उसे बदलकर मिट्टी मिश्रित और घटिया सामग्री भेज दी गई। इससे गुणवत्ता जांच प्रक्रिया, परिवहन व्यवस्था और निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
पहले भी मिल रही थीं अमानक गेहूं की शिकायतें
वेयरहाउस संचालक आरपी सुहाने के अनुसार यह गोदाम लगभग एक माह पहले वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की सांईखेड़ा शाखा द्वारा अधिग्रहित किया गया था। उन्होंने बताया कि गोदाम संचालक की भूमिका केवल भंडारण सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित रहती है और माल की गुणवत्ता जांच संबंधित विभाग द्वारा की जाती है। हालांकि कर्मचारियों की ओर से पिछले कई दिनों से अमानक गेहूं आने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिसकी जानकारी शाखा प्रबंधन को भी दी गई थी।
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल ने बताया कि संबंधित खेप को वापस कर दिया गया है और समूह से मानक गुणवत्ता का गेहूं मंगाने के निर्देश दिए गए हैं।
खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब प्रदेश सरकार समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी में पारदर्शिता और सख्त निगरानी के दावे कर रही है। मिट्टी से भरी बोरियों का वेयरहाउस तक पहुंच जाना न केवल गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली की कमजोरी उजागर करता है बल्कि किसानों के हितों और सरकारी संसाधनों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस कथित घोटाले के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।