कर्नाटक में कांग्रेस ने सरकार बना ली, लेकिन अब एक नई मुसीबत सामने आ गई है। यह है विधानसभा स्पीकर का चुनाव। स्थिति यह है कि कोई विधायक स्पीकर बनने को राजी नहीं है। विधायकों का मानना है कि कर्नाटक में विधानसभा स्पीकर की कुर्सी मनहूस है और जो भी वहां बैठता है, चुनाव में उसकी हार हो जाती है।कर्नाटक विधानसभा के इतिहास में 2004 के बाद से ऐसे उदाहरण मिले हैं जब विधानसभा अध्यक्ष रहे नेता को हार का सामना करना पड़ा या उनका राजनीतिक करियर ही समाप्त हो गया।ताजा उदाहरण विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी का है। ये प्रदेश की पिछली बसवराज बोम्मई की सरकार में स्पीकर थे, लेकिन इस बार इन्हें हार का मिली।
कर्नाटक में कांग्रेस ने सरकार बना ली, लेकिन अब एक नई मुसीबत सामने आ गई है। यह है विधानसभा स्पीकर का चुनाव। स्थिति यह है कि कोई विधायक स्पीकर बनने को राजी नहीं है।
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