दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी फोन के इंटरसेप्शन, टैपिंग या ट्रैकिंग के बारे में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत सूचना नहीं दी जा सकती। जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने कहा कि फोन का इंटरसेप्शन, टेपिंग या ट्रेकिंग की सरकार द्वारा इस आधार पर अनुमति दी जाती है कि ऐसा करना देश की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था के हित में या किसी अपराध के लिए उकसावे को रोकने के लिए जरूरी है। यह सब कारण सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा आठ के तहत आते हैं जिनमें सूचना के प्रकटन से छूट दी गई है।
किसी फोन के इंटरसेप्शन, टैपिंग या ट्रैकिंग के बारे में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत सूचना नहीं दी जा सकती।