वयोवृद्ध राजनेता शरद पवार ने विपक्षी दलों के गठबंधन- इंडिया ब्लॉक के पीएम उम्मीदवार पर बरकरार सस्पेंस के मुद्दे पर बयान दिया है। उन्होंने कहा, 'अगर कोई चेहरा पेश न भी किया जाए तो फर्क नहीं पड़ेगा।' पवार ने कहा कि अगर कोई चेहरा सामने नहीं रखा जाए है तो कोई परिणाम नहीं निकलता, ऐसी धारणा सही नहीं है। उन्होंने 1977 के आम चुनाव के बाद मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री बनने का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल को चुनौती देने के लिए एक नई पार्टी अस्तित्व में आई है। ऐसे में कोई चेहरा सामने नहीं भी रखा जाए तो कोई नुकसान नहीं होगा। पवार ने कहा कि अगर जनता बदलाव के मूड में हैं, तो मतदाता बदलाव लाने के पक्ष में ही अपना फैसला सुनाएंगे।
शरद पवार ने कहा है कि चेहरा प्रोजेक्ट करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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