फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान एआई2379 में हुई गंभीर घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जल्द जारी होने की संभावना है। मामले से परिचित सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट लगभग एक सप्ताह के भीतर सामने आ सकती है। 4 अगस्त को उड़ान के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया था, जिससे विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में अफरातफरी मच गई थी।
इस घटना में कुल 20 यात्री और चालक दल के 4 सदस्य घायल हुए थे। विमान उस समय सामान्य क्रूज ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था, जब अचानक उसकी ऊंचाई में तेज गिरावट दर्ज की गई। एयर इंडिया ने शुरुआती तौर पर इस घटना के लिए टर्बुलेंस यानी हवा में तेज अस्थिरता को कारण बताया था, लेकिन बाद में सामने आई तकनीकी जानकारी ने मामले की जांच को एक अलग दिशा दे दी।
एयरबस की रिपोर्ट में सामने आई हाइड्रोलिक सिस्टम की समस्या
फ्रांसीसी विमान निर्माता एयरबस की एक रिपोर्ट के अनुसार, विमान की ऊंचाई में अचानक आई गिरावट केवल टर्बुलेंस से जुड़ी नहीं हो सकती है। रिपोर्ट में विमान के ग्रीन, ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव कम होने का उल्लेख किया गया है। इसके कारण विमान के कुछ महत्वपूर्ण नियंत्रण तंत्रों पर लगभग 4 सेकंड के लिए असर पड़ने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान एलिवेटर और एइलरॉन नियंत्रण सतहों पर अस्थायी प्रभाव पड़ा। विमान की दिशा और ऊंचाई नियंत्रित करने में इन प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने अब यह अहम सवाल है कि अचानक हुई तकनीकी गड़बड़ी और विमान की ऊंचाई में आई गिरावट के बीच किस स्तर का संबंध था।
ओडिशा तट पार करने के दौरान आए कई चेतावनी संदेश
उड़ान के बाद केंद्रीयकृत फॉल्ट डिस्प्ले सिस्टम के रिकॉर्ड में भी कई चेतावनी संदेश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय समयानुसार सुबह करीब 9:32 बजे, जब विमान बंगाल की खाड़ी के ऊपर से उड़ान भरने के बाद ओडिशा तट को पार कर रहा था, तब महज 1 मिनट के भीतर कम से कम 9 चेतावनी संदेश सामने आए।
इन चेतावनियों में हाइड्रोलिक सिस्टम में कम दबाव के अलावा ऑटोपायलट के डिस्कनेक्ट होने और एलिवेटर फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम में गड़बड़ी से संबंधित संदेश भी शामिल बताए गए। इतनी कम अवधि में कई तकनीकी चेतावनियों का दर्ज होना जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है और प्रारंभिक रिपोर्ट में इन घटनाओं के क्रम की विस्तृत पड़ताल की जा सकती है।
इमरजेंसी एग्जिट सेंसर से लेकर इंजन एंटी-आइस तक मिले संकेत
तकनीकी रिकॉर्ड के अनुसार, सुबह 9:33 बजे और 9:35 बजे विमान के 2 इमरजेंसी एग्जिट दरवाजों से जुड़े सेंसर की चेतावनियां भी दर्ज की गईं। इसके बाद सुबह 10:16 बजे इंजन एंटी-आइस सिस्टम से संबंधित एक फॉल्ट का संकेत मिला। उड़ान के दौरान बाद में सुबह 10:52 बजे एक बार फिर ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट होने की चेतावनी दर्ज हुई।
जांच में यह देखा जाएगा कि क्या ये सभी तकनीकी संदेश किसी एक बड़ी प्रणालीगत समस्या से जुड़े थे या फिर अलग-अलग कारणों से उत्पन्न हुए थे। विशेष रूप से हाइड्रोलिक दबाव में कमी, फ्लाइट-कंट्रोल से संबंधित चेतावनियां और ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट होने की घटनाएं जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बिंदु हो सकती हैं।
टर्बुलेंस या तकनीकी खराबी, जांच से होगा स्पष्ट
एयर इंडिया के शुरुआती बयान में टर्बुलेंस को विमान की अचानक हुई हलचल और ऊंचाई में बदलाव का कारण बताया गया था। हालांकि एयरबस की तकनीकी रिपोर्ट और विमान के फॉल्ट रिकॉर्ड में सामने आए संकेतों के बाद अब जांच का दायरा व्यापक हो गया है। अंतिम रूप से यह निर्धारित किया जाना बाकी है कि घटना के पीछे मौसम संबंधी परिस्थितियों, तकनीकी खराबी या दोनों कारकों की क्या भूमिका रही।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि उड़ान एआई2379 में 300 फीट की अचानक गिरावट किन परिस्थितियों में हुई और उस समय विमान की विभिन्न प्रणालियों में दर्ज चेतावनियों का आपस में क्या संबंध था। रिपोर्ट से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक तकनीकी और परिचालन संबंधी कदमों पर भी महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।