लखनऊ/रायबरेली: उत्तर प्रदेश में फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी महत्वाकांक्षी 'पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रथ यात्रा' की शुरुआत के लिए रायबरेली को चुना है। 24 सितंबर से शुरू हो रही यह यात्रा कांग्रेस के शीर्ष नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र से रवाना होगी। सीट बंटवारे की आधिकारिक बातचीत शुरू होने से ठीक पहले विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के दो प्रमुख घटकों के बीच इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है।
बछरावां से शुरुआत और विधायक के घर पर चाय पे चर्चा
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अखिलेश यादव की यात्रा का पहला चरण रायबरेली के बछरावां से शुरू होगा। वहां से वह हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक और प्रमुख पिछड़ा वर्ग (OBC) नेता राहुल लोधी के आवास पर जाएंगे। इसके बाद रथ यात्रा रायबरेली शहर पहुंचेगी। हालांकि सपा नेतृत्व ने अभी तक इस प्रदेशव्यापी यात्रा के आगे के विस्तृत मार्ग और अंतिम शेड्यूल को अंतिम रूप नहीं दिया है।
फ़िरोज़ गांधी कॉलेज विवाद के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
अखिलेश यादव का यह दौरा 17 सितंबर को रायबरेली शहर स्थित फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी (ABVP) और सपा समर्थित छात्र सभा के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प की पृष्ठभूमि में हो रहा है। सपा ने आरोप लगाया है कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में उनके छात्र नेताओं के साथ मारपीट की गई। विधायक राहुल लोधी ने भी पुलिस प्रशासन पर "पक्षपात" और "जातिगत भेदभाव" के गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश यादव ने पूरे घटनाक्रम को 'पीडीए' पर हमला करार दिया है।
विवाद को 'स्थानीय घटना' बता रही सपा, पर गठबंधन के कयास तेज़
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने स्पष्ट किया कि 24 सितंबर के रायबरेली दौरे का तात्कालिक कारण छात्र सभा के नेताओं के साथ हुई अभद्रता और प्रशासनिक ढिलाई है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का यह दौरा एक तरह का ट्रायल कार्यक्रम है और इसे औपचारिक प्रदेशव्यापी यात्रा से अलग देखा जाना चाहिए।हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा का समय और स्थान महज इत्तेफाक नहीं है। रायबरेली न केवल राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है, बल्कि इस सीट के तहत आने वाली 5 विधानसभा सीटों में से 3 पर सपा (बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी) का कब्जा है, जबकि 2 सीटें (रायबरेली शहर और ऊंचाहार) भाजपा के पास हैं।
सीट बंटवारे में बढ़त बनाने का दांव?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए आगामी सीटों के तालमेल पर बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी रायबरेली के विधानसभा क्षेत्रों में अपने मौजूदा विधायकों की संख्या का हवाला देकर बड़े हिस्से का दावा ठोक सकती है।दूसरी तरफ, कांग्रेस खेमा भी सपा के इस कदम पर बारीक नजर बनाए हुए है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रायबरेली राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते पार्टी के लिए बेहद खास है। यद्यपि वहां कांग्रेस का कोई विधायक नहीं है, फिर भी सीट शेयरिंग में पार्टी अपनी सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग करेगी। अखिलेश यादव की इस रथ यात्रा से सपा जहां अपने 'पीडीए' सोशल इंजीनियरिंग कार्ड को धार दे रही है, वहीं गठबंधन के भीतर अपनी मजबूत चुनावी मौजूदगी का संदेश भी दे रही है।