उत्तरप्रदेश की राजनीति में अपना एक स्थान रखने वाली आरएलडी पार्टी के अध्यक्ष जयंत चौधरी के बारे में कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थीं कि इस बार वो भाजपा के साथ गठबंधन कर सकते हैं लेकिन हाल ही में उनके बैंगलोर में होने वाली बिपक्षी दलों की बैठक में जाने वाले फैसले ने उन सभी अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है !
जयंत चौधरी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच थीं अनबन की ख़बरें –
पिछले कुछ दिनों से उत्तरप्रदेश की राजनीति में पूर्ण रूप से सक्रिय ना होने की वजह से और लम्बे वक़्त से एकांतवास में रहने से अटकलें तेज़ थीं कि इस बार आरएलडी पार्टी के अध्यक्ष जयंत चौधरी सपा से गठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ आ सकते हैं, क्यूंकि सूबे में ऐसी ख़बरें उड़ रही थीं कि अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच सब ठीक नहीं है इसलिए उन्होंने पिछली बार हुई बिपक्षी की बैठक में ना जाकर इन ख़बरों को और भी हवा दे दी थी फिर इसके बाद भी जब एक जुलाई को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का जन्मदिन था तो जयंत ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं भी नहीं भेजी थीं और इस बात ने अनबन की ख़बरों के लिए खाद-पानी का काम किया था !
समाजवादी पार्टी के समर्थन से ही राज्यसभा के सदस्य हैं जयंत चौधरी !
आरएलडी पार्टी के अध्यक्ष जयंत चौधरी समाजवादी पार्टी के समर्थन से ही राज्यसभा के सदस्य हैं, जयंत चौधरी की पार्टी से उत्तरप्रदेश में कुल 9 विधायक हैं, पश्चिमी उत्तरप्रदेश में जयंत की पार्टी का अच्छा प्रभाव है जिसमें मुख्य रूप से जाट वोटर्स का समर्थन है, जाट बाहुल्य क्षेत्र में जयंत चौधरी की पार्टी की अच्छी पकड़ होने के कारण उन्हें जाटों का प्रमुख नेता भी माना जाता है !
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