फतहा - बिहार के नगर थाना क्षेत्र के फतहा गांव से बेटी के जन्म पर खुशियां मनाने की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान को साकार करते हुए राहुल कुमार ने अपनी नवजात बेटी के जन्म का जश्न बेहद खास अंदाज में मनाया। सदर अस्पताल में उनकी पत्नी मनीषा ने पहली संतान के रूप में एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म की खबर मिलते ही राहुल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
बैलून और फूलों से सजवाई कार
पत्नी और नवजात बेटी को अस्पताल से घर लाने के लिए राहुल कुमार ने एक कार किराये पर ली और उसे रंग-बिरंगे बैलून तथा फूलों से आकर्षक ढंग से सजवाया। कार को इस तरह तैयार किया गया कि वह किसी शादी या बड़े उत्सव का हिस्सा दिखाई दे रही थी। अस्पताल परिसर में यह दृश्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया।
गुलाब की पंखुड़ियों से किया स्वागत
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जैसे ही मनीषा अपनी नवजात बेटी को गोद में लेकर बाहर निकलीं, राहुल ने दोनों का गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर स्वागत किया। इस भावुक पल को देखकर अस्पताल में मौजूद मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्यकर्मी भी भावुक हो गए। कई लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए सकारात्मक संदेश बताया।
समाज के लिए बना प्रेरणादायक उदाहरण
राहुल कुमार ने कहा कि बेटी का जन्म उनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि बेटियां परिवार की शान होती हैं और समाज में उनके प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उनका मानना है कि जिस तरह बेटे के जन्म पर खुशियां मनाई जाती हैं, उसी तरह बेटियों के जन्म पर भी पूरे उत्साह के साथ जश्न मनाया जाना चाहिए।
'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान को मिला बल
राहुल की इस पहल की स्थानीय लोगों ने जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि ऐसे उदाहरण समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को मजबूत करते हैं और लैंगिक समानता का संदेश देते हैं। यह अनोखा जश्न न केवल एक परिवार की खुशी का प्रतीक बना, बल्कि बेटियों के सम्मान और उनके महत्व को भी नई पहचान देने वाला प्रेरक संदेश बन गया।
