नई दिल्ली. केंद्र सरकार की दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास संस्था सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स यानी C-DOT आपदा के दौरान संचार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में नई तकनीक विकसित कर रहा है। इसके तहत मौजूदा सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम में एक इंटरैक्टिव व्यवस्था जोड़ी जा रही है, जिससे आपदा प्रभावित लोगों और प्रशासन के बीच दोतरफा संवाद संभव हो सकेगा। वर्तमान व्यवस्था मुख्य रूप से प्रशासन से नागरिकों तक चेतावनी पहुंचाने का काम करती है, लेकिन प्रस्तावित प्रणाली में नागरिक भी अपनी स्थिति और जरूरत की जानकारी अधिकारियों तक भेज सकेंगे।
10 सेकंड से भी कम समय में पहुंचता है अलर्ट
मौजूदा सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम का इस्तेमाल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। इसके जरिये किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद मोबाइल फोन पर लक्षित चेतावनी संदेश 10 सेकंड से भी कम समय में भेजे जा सकते हैं। प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थिति में यह सुविधा लोगों तक समय रहते महत्वपूर्ण सूचना पहुंचाने में मदद करती है। अब C-DOT इसी व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है, ताकि चेतावनी जारी करने के साथ प्रभावित लोगों की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी प्रशासन को मिल सके।
‘मैं सुरक्षित हूं’ से लेकर निकासी तक के विकल्प
C-DOT के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकुमार उपाध्याय के अनुसार प्रस्तावित प्रणाली में आपदा प्रभावित मोबाइल उपयोगकर्ताओं को उनकी जरूरत के अनुरूप अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए बाढ़ जैसी स्थिति में किसी व्यक्ति के सामने ‘मैं सुरक्षित हूं’, ‘मुझे निकालें’ या ‘मुझे दवा भेजें’ जैसे विकल्प आ सकते हैं। उपयोगकर्ता अपनी स्थिति के अनुरूप विकल्प चुनकर प्रशासन को जानकारी भेज सकेगा। इससे राहत एवं बचाव दल को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस स्थान पर कितने लोगों को तत्काल सहायता की जरूरत है।
मानचित्र पर दिखेगी जरूरतमंद लोगों की स्थिति
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि प्रशासन को आपदा प्रभावित क्षेत्र की अधिक स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी। किसी जिले के कलेक्टर या संबंधित अधिकारी मानचित्र पर यह देख सकेंगे कि किन लोगों ने खुद को सुरक्षित बताया है और किन लोगों ने निकासी या अन्य सहायता की मांग की है। इससे राहत एवं बचाव संसाधनों को जरूरत के अनुसार प्राथमिकता देने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से बाढ़, भूस्खलन, चक्रवात या अन्य व्यापक आपदा की स्थिति में यह जानकारी प्रशासनिक निर्णयों को अधिक लक्षित बना सकती है।
बहुभाषी आवाज आधारित सुविधा पर भी काम
C-DOT केवल दोतरफा संदेश प्रणाली तक सीमित नहीं रहना चाहता। संस्था आपदा संबंधी अलर्ट के लिए आवाज आधारित प्रश्न पूछने की सुविधा भी विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य उन लोगों के लिए आपात सूचना को अधिक सुलभ बनाना है जो लिखित संदेश के बजाय अपनी भाषा में बोलकर जानकारी प्राप्त करना पसंद करते हैं। प्रस्तावित सुविधा में व्यक्ति अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेगा और उसे उसी भाषा में जवाब मिलने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके लिए C-DOT कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली को स्वयं विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है।
तमिल और तेलुगु समेत कई भारतीय भाषाओं पर जोर
आवाज आधारित सुविधा को बहुभाषी बनाने की तैयारी की जा रही है, ताकि अलग-अलग राज्यों में रहने वाले लोग अपनी सहज भाषा में आपदा संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकें। C-DOT के अनुसार कोई व्यक्ति तमिल या तेलुगु में सवाल पूछ सकता है और जवाब भी उसी भाषा में प्राप्त कर सकता है। इसके लिए उपयोगकर्ता की आवाज को वास्तविक समय में पहले एक मध्यवर्ती भाषा में परिवर्तित कर उसके बाद संबंधित भारतीय भाषा में उत्तर तैयार करने की तकनीकी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इससे आपातकालीन संचार में भाषाई बाधा कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पहले आवाज सुविधा, फिर विकसित होगा दोतरफा तंत्र
C-DOT के अनुसार आवाज आधारित प्रश्न सुविधा को पहले परिचालन में लाने की योजना है, जबकि मोबाइल उपयोगकर्ताओं को विकल्प चुनकर प्रशासन को अपनी प्रतिक्रिया भेजने वाली पूरी दोतरफा प्रणाली विकसित होने में कम से कम 1 साल लग सकता है। तकनीक विकसित होने के बाद इसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की मौजूदा व्यवस्था के साथ जोड़ा जाएगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्राधिकरण C-DOT से इस तकनीक की खरीद करता है या नहीं। यानी तकनीकी विकास के साथ इसके संस्थागत इस्तेमाल का फैसला भी महत्वपूर्ण होगा।
4 देशों में हो चुका है सेल ब्रॉडकास्ट का परीक्षण
C-DOT अपने सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की अंतरराष्ट्रीय संभावनाओं को भी परख रहा है। संस्था ने 4 देशों में इस प्रणाली का सफल परीक्षण किया है, जहां भविष्य में इसके इस्तेमाल की संभावना है। हालांकि C-DOT के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने परीक्षण किए गए देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, क्योंकि वहां अभी परीक्षण प्रक्रिया जारी है। इससे संकेत मिलता है कि भारत में विकसित यह आपदा चेतावनी तकनीक भविष्य में दूसरे देशों के लिए भी उपयोगी समाधान बन सकती है।
आपदा प्रबंधन में बदल सकता है संचार का तरीका
यदि प्रस्तावित दोतरफा प्रणाली सफलतापूर्वक लागू होती है तो आपदा संचार का मौजूदा स्वरूप काफी बदल सकता है। अभी प्रशासन मुख्य रूप से चेतावनी जारी कर नागरिकों तक सूचना पहुंचाता है, जबकि नई व्यवस्था में प्रभावित नागरिक भी वास्तविक समय में अपनी जरूरत बता सकेंगे। इससे राहत कार्यों में प्राथमिकता तय करने, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और गंभीर रूप से फंसे लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसकी वास्तविक प्रभावशीलता व्यापक परीक्षण, नेटवर्क उपलब्धता, प्रशासनिक समन्वय और बड़े पैमाने पर उपयोग के बाद ही स्पष्ट होगी।