नई दिल्ली. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने गुरुवार को कहा कि युद्ध की स्थिति में कोई भी सुरक्षित जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि देश एक समय में सिर्फ एक युद्ध की तैयारी करने का जोखिम नहीं उठा सकता क्योंकि भविष्य के युद्ध के मैदान कई क्षेत्रों में एक साथ आपस में जुड़े हुए और कड़े मुकाबले वाले होंगे। एक डिफेंस कॉन्क्लेव में जनरल सुब्रमणि ने कहा कि आज सीखने की गति और हालात के अनुसार ढलने की क्षमता युद्ध की बेहद महत्वपूर्ण काबिलियत है। जो भी तेजी से सीखता है और हालात के अनुसार तेजी से ढलता है वही जीतेगा। युद्ध का स्वरूप हमारी समझ से कहीं अधिक तेजी से बदल रहा है।
पारदर्शी और सस्ता होता युद्ध मैदान
जनरल सुब्रमणि ने कहा कि युद्ध का मैदान अधिक पारदर्शी और सस्ता होता जा रहा है। लगातार निगरानी के कारण छिपना मुश्किल होता जा रहा है। अगर आप पकड़े गए तो आप निशाना बन जाएंगे आप पर हमला होगा और आप मारे जाएंगे। अब अग्रिम मोर्चे और पीछे के इलाके में कोई फर्क नहीं है। युद्ध का मैदान अग्रिम मोर्चे से पीछे के इलाकों तक फैल गया है। कोई भी कहीं भी सुरक्षित नहीं है। यह बदलाव आधुनिक युद्ध की प्रकृति को पूरी तरह बदल रहा है। पारंपरिक सुरक्षा अवधारणाएं अब पर्याप्त नहीं रह गई हैं।
पूरे देश की भागीदारी
युद्ध में सिर्फ सैनिक ही नहीं बल्कि पूरा देश शामिल होता है। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण दिया। इस युद्ध दोनों देशों की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। नागरिक क्षेत्र भी प्रभावित हो रहे हैं और युद्ध की पहुंच पारंपरिक सीमाओं से परे चली गई है। ऐसे में केवल सैन्य तैयारी पर्याप्त नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर समग्र तैयारियां जरूरी हैं। भविष्य के युद्ध बहुआयामी होंगे जिनमें साइबर अंतरिक्ष और सूचना जैसे क्षेत्र भी शामिल होंगे।
तेजी से सीखने और ढलने की क्षमता
सीडीएस ने जोर दिया कि आज की सबसे बड़ी काबिलियत तेजी से सीखने और बदलते हालात के अनुसार ढलने की है। जो सेना या देश इस क्षमता में आगे होगा वही सफल होगा। युद्ध का स्वरूप इतनी तेजी से बदल रहा है कि पुरानी रणनीतियां जल्दी अप्रासंगिक हो जाती हैं। निरंतर प्रशिक्षण नवाचार और तकनीक का अपनाना अनिवार्य हो गया है। भारत को इन बदलावों के लिए तैयार रहना होगा। बहुआयामी खतरों से निपटने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना होगा।
भविष्य की तैयारी पर जोर
जनरल सुब्रमणि के बयान से स्पष्ट है कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक सीमाओं से परे होंगे। कोई भी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। देश को एक साथ कई मोर्चों पर संघर्ष की तैयारी रखनी होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक लेते हुए भारत को अपनी रक्षा रणनीति को और व्यापक बनाना होगा। सीखने की गति और अनुकूलन क्षमता ही भविष्य की सफलता की कुंजी है। सीडीएस का संदेश राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों को नई दिशा देने वाला है।