नई दिल्ली. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर विपक्ष अब उनके खिलाफ एकजुट नजर आ रहा है। उन्हें हटाने की मांग कर रहे विपक्षी इंडिया गठबंधन के बड़े नेता संपर्क में हैं। अगले सप्ताह गठबंधन की बैठक और साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना बनाई जा रही है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का नोटिस तैयार किया जा रहा है। इस बारे में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से बात की है। इसके अलावा सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने ममता बनर्जी से बात की है। मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक भी है। इस मीटिंग में मुख्य तौर पर एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर चर्चा हो सकती है और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध तेज करने की रणनीति बनाई जा सकती है।
फॉर्म 6 में बदलाव पर हमला
फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर भी कांग्रेस हमलावर है। शनिवार को सुबह कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखी पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट से अपील की है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का स्वत संज्ञान लेना चाहिए। जयराम रमेश ने मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को एसआईआर और फॉर्म 6 में असंवैधानिक बदलाव के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। जयराम रमेश ने कहा कि इलेक्शन कमिशन अब भी पैनिक में है। इसी घबराहट में उसने तेजी से जेन जी वोटरों के नाम जोड़ने को कहा है। उन्होंने कहा कि अब युवा पीढ़ी के वोटरों के नाम जोड़े जा रहे हैं और उसे सोशल मीडिया के माध्यम से बताया जा रहा है।
जयराम रमेश का आरोप
जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि कल देर रात घबराए हुए चुनाव आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन कैंप लगाने और सोशल मीडिया के जरिए उनका व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया। लेकिन इससे पहले खुद मुख्य चुनाव आयुक्त ने फॉर्म 6 में खुले तौर पर गैरकानूनी और असंवैधानिक बदलाव कर युवा मतदाताओं के लिए अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाना लगभग असंभव बना दिया था। इसमें एक नया अनिवार्य सेक्शन जोड़ दिया गया जिसमें पूछा जाता है कि आपके माता-पिता या दादा-दादी पिछली एसआईआर में शामिल थे या नहीं। इससे पहली बार वोट देने वाले जेन जी मतदाताओं के लिए एक नई बाधा खड़ी हो गई।
कांग्रेस का कानूनी तर्क
कांग्रेस ने लिखा कि यह बदलाव पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने लिखा कि जुलाई 2026 की शुरुआत में बिना किसी आधिकारिक नोटिफिकेशन के ऑनलाइन फॉर्म को चुपके से बदल दिया गया। इसके अलावा ईसीआई के पास फॉर्म 6 में संशोधन करने का अधिकार ही नहीं है। यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। फॉर्म 6 को नियंत्रित करने वाले नियमों में कोई संशोधन किए बिना ही फॉर्म बदल दिया गया। ऐसा केवल केंद्र सरकार संसद को उचित सूचना देकर कर सकती है। कानून द्वारा निर्धारित एक वैधानिक फॉर्म को घबराई हुई पीएम-एचएम की जोड़ी के इशारे पर ज्ञानेश कुमार ने एकतरफा बदल दिया। विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मुद्दा बता रहा है।
आगे की रणनीति और महाबैठक
अगले सप्ताह विपक्षी गठबंधन की महाबैठक और साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना है जिसमें ममता बनर्जी से लेकर लेफ्ट तक सभी शामिल होने की उम्मीद है। महाभियोग नोटिस को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा होगी। विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित असंवैधानिक बदलावों को लेकर लगातार दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट से स्वत संज्ञान लेने की अपील भी की गई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होने की संभावना है।