जम्मू-कश्मीर में अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने पर्वतीय और बर्फीले क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के उन जवानों के लिए विशेष शीतकालीन कपड़े और अत्याधुनिक उपकरण खरीदने हेतु 4.54 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है, जो वर्षभर ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में तैनात रहते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक उपकरणों और बेहतर जीवनरक्षक संसाधनों से जवानों की परिचालन क्षमता, सहनशक्ति और सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे आतंकवादियों के विरुद्ध लंबे समय तक चलने वाले अभियानों को नई मजबूती मिलेगी।
600 जवानों को मिलेंगे अत्याधुनिक शीतकालीन उपकरण
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार स्वीकृत राशि का उपयोग लगभग 600 सीआरपीएफ जवानों के लिए अत्यधिक ठंड और बर्फीले क्षेत्रों में आवश्यक विशेष उपकरणों की खरीद पर किया जाएगा। इन संसाधनों में स्नो बूट, गेटर्स, स्नो गॉगल्स, उच्च गुणवत्ता वाले स्लीपिंग बैग, इंसुलेटिंग मैट, रक्सैक, विशेष दस्ताने, पर्वतीय टेंट, थर्मल इनसोल, गर्म कंबल तथा रेस्क्यू बैग जैसे जीवनरक्षक उपकरण शामिल हैं। ये सभी उपकरण ऐसे वातावरण के लिए तैयार किए गए हैं जहां लगातार बर्फबारी, तेज हवाएं और अत्यधिक कम तापमान सामान्य परिस्थितियां होती हैं। इन संसाधनों से जवानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अधिक समय तक प्रभावी ढंग से डटे रहने में सहायता मिलेगी।
डीआरडीओ विकसित ‘हिमसुरक्षा’ पोशाक बनेगी जवानों की नई ढाल
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित विशेष शीतकालीन पोशाक ‘हिमसुरक्षा’ का उपलब्ध कराया जाना है। यह पोशाक अत्यधिक कम तापमान में भी शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से विकसित की गई है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी विशेष पोशाकें केवल आराम ही नहीं देतीं, बल्कि लंबे समय तक गश्त, निगरानी और सामरिक अभियानों के दौरान सैनिकों की कार्यक्षमता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अत्यधिक ठंड के कारण होने वाली शारीरिक समस्याओं और थकान को कम करने में भी इनका योगदान माना जाता है, जिससे जवान कठिन परिस्थितियों में भी पूरी क्षमता के साथ अभियान जारी रख सकते हैं।
ऊंचाई वाले इलाकों में मजबूत हो रहा आतंकवाद विरोधी सुरक्षा तंत्र
सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में यह अनुभव किया है कि आतंकवादी संगठन बर्फ से ढके दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों और जंगलों का उपयोग छिपने तथा सुरक्षा बलों की निगरानी से बचने के लिए करते रहे हैं। इसी रणनीति का प्रभावी जवाब देने के लिए छह हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अस्थायी परिचालन अड्डों की स्थापना की गई है। इन अड्डों से सीआरपीएफ के विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो लगातार गश्त, निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर तलाशी अभियान संचालित करते हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इन चौकियों की सक्रियता आतंकवादियों की आवाजाही सीमित करने और घुसपैठ रोकने की व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
‘ढोक’ तक पहुंचने की रणनीति से बढ़ेगा दबाव
जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मिट्टी और पत्थरों से बने अस्थायी आश्रयों, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘ढोक’ कहा जाता है, का उपयोग लंबे समय से आतंकवादी छिपने के लिए करते रहे हैं। सुरक्षा बल अब इन इलाकों में अधिक समय तक ठहरकर निगरानी रखने और नियमित तलाशी अभियान चलाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। आधुनिक उपकरणों और विशेष शीतकालीन संसाधनों के उपलब्ध होने से जवान कठिन मौसम में भी लंबे समय तक सक्रिय रह सकेंगे। इससे आतंकवादियों के लिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों को सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो जाएगा। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार यह रणनीति आतंकवाद विरोधी अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
55 अस्थायी परिचालन अड्डों से बढ़ी निगरानी क्षमता
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार सीआरपीएफ ने जम्मू-कश्मीर के जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों में अब तक 55 अस्थायी परिचालन अड्डे स्थापित किए हैं। प्रत्येक अड्डे पर सामान्यतः 15 से 25 सशस्त्र जवान तैनात रहते हैं, जिन्हें आवश्यक संचार सुविधाएं, विश्राम स्थल और बुनियादी रसद उपलब्ध कराई जाती है। इन अड्डों का उद्देश्य केवल आतंकवाद विरोधी अभियान चलाना ही नहीं, बल्कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार सुरक्षा उपस्थिति बनाए रखना भी है। स्थायी निगरानी से घुसपैठ, हथियारों की आवाजाही और संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित प्रतिक्रिया देना अधिक आसान हो गया है।
आधुनिक संसाधनों से बदलेगी पर्वतीय अभियानों की तस्वीर
राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों में केवल हथियारों की शक्ति पर्याप्त नहीं होती, बल्कि सैनिकों की परिचालन क्षमता, मौसम के अनुरूप उपकरण और जीवनरक्षक संसाधन भी समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। विशेष शीतकालीन पोशाक, अत्याधुनिक उपकरण और बेहतर लॉजिस्टिक समर्थन से सीआरपीएफ के जवान अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में भी अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे। यह पहल न केवल जवानों की सुरक्षा और मनोबल को मजबूत करेगी, बल्कि जम्मू-कश्मीर के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में आतंकवाद के विरुद्ध चल रहे अभियानों को भी नई गति और मजबूती प्रदान करेगी।