नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने बताया कि शहर में संचालित करीब 923 से 924 कोचिंग सेंटरों का अगले एक महीने के भीतर फायर ऑडिट और सुरक्षा निरीक्षण कराया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि कोचिंग संस्थानों के लिए नियम और कानून तैयार करने के उद्देश्य से गठित समिति की बैठक बुला ली गई है। यह समिति गौबा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर बनाई गई है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए Municipal Corporation of Delhi (एमसीडी) को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है।
एक महीने में पूरी होगी जांच
दिल्ली सरकार ने एमसीडी और अन्य संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे एक महीने के भीतर सभी कोचिंग संस्थानों की जांच पूरी करें। निरीक्षण के दौरान फायर सेफ्टी, भवन सुरक्षा, आपातकालीन निकास व्यवस्था और अन्य जरूरी दस्तावेजों की भी समीक्षा की जाएगी। आशीष सूद ने स्पष्ट किया कि जिन संस्थानों के दस्तावेज अधूरे पाए जाएंगे या जो सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे कोचिंग सेंटरों को सील भी किया जा सकता है।
जल्द आएगा नया कानून
मंत्री ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के तहत गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित कानून में फीस संरचना, संचालन प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों और छात्रों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
एनसीईआरटी की किताब में इमरजेंसी अध्याय पर भी बोले
एनसीईआरटी की कक्षा 9 की पुस्तक में आपातकाल (इमरजेंसी) से जुड़ा नया अध्याय शामिल किए जाने के मुद्दे पर भी मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रमों की जानकारी होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को यह समझना चाहिए कि घोषित और अघोषित आपातकाल में क्या अंतर होता है तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा क्यों महत्वपूर्ण है। दिल्ली सरकार का मानना है कि कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सख्त नियमों का पालन आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना या सुरक्षा चूक से बचा जा सके।