देश में आम चुनावों में अब कुछ ही महीने रह गए हैं। इस बीच सरकार ने सरकारी कंपनियों को बेचने की प्रक्रिया रोक दी है। हालांकि सीसीआईए कई कंपनियों को बेचने के लिए हरी झंडी दे चुकी है लेकिन सरकार इस दिशा में तेजी से आगे नहीं बढ़ रही है।
नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों में अब कुछ ही महीने रह गए हैं। आम चुनाव नजदीक आने के साथ ही सरकार ने अपनी निजीकरण की कार्रवाई लगभग रोक दी है और अब शेयर बाजारों में अल्पांश हिस्सेदारी बेचने का विकल्प चुना है। कुछ चुनिंदा घरानों को हिस्सेदारी बेचने के विपक्षी दलों के आरोपों के बीच सरकार ने यह कदम उठाया है। हालांकि, इसके परिणामस्वरूप चालू वित्त वर्ष 2023-24 के विनिवेश लक्ष्य से फिर चूकने की आशंका है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और कॉनकॉर जैसी बड़ी निजीकरण योजनाएं पहले से ही ठंडे बस्ते में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सार्थक निजीकरण अप्रैल/मई के आम चुनाव के बाद ही हो सकता है।
आम चुनावों से पहले रुकी निजीकरण की प्रक्रिया