नई दिल्ली - भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि देश किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। उनका यह बयान एलन मस्क की ओर से भारतीय सैटेलाइट संचार नियमों पर सवाल उठाए जाने के बीच आया है। सिंधिया ने कहा कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए एक से अधिक कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं और सभी को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
सिंधिया बोले- तीन कंपनियों को मिला है लाइसेंस
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के दौरान सिंधिया ने सैटेलाइट संचार सेवाओं को लेकर हो रही चर्चा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक विशेष कंपनी पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जबकि भारत में तीन कंपनियों को सैटेलाइट संचार सेवा के लिए लाइसेंस मिल चुके हैं।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, किसी भी कंपनी को सेवा शुरू करने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी शर्तों और निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा। सरकार का कहना है कि नियम किसी एक कंपनी को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं, बल्कि सभी सेवा प्रदाताओं पर समान रूप से लागू होते हैं।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर चल रही बहस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र हुआ। राहुल गांधी द्वारा एलन मस्क का बचाव किए जाने के संदर्भ में सिंधिया ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह किस दिशा में जा रही है। सिंधिया की यह टिप्पणी राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है। सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़े मुख्य मुद्दे में कंपनियों के लिए लाइसेंस, सुरक्षा मंजूरी और नियामकीय शर्तों का पालन शामिल है।
भारत के डिजिटल नेटवर्क पर क्या बोले मंत्री?
सिंधिया ने देश में डिजिटल कनेक्टिविटी की प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि भारत में करीब 1.1 अरब ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं और देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में 5G कवरेज उपलब्ध है। सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को इंटरनेट सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानती है। सैटेलाइट संचार सेवाओं को भी उन इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने के संभावित माध्यम के रूप में देखा जाता है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना कठिन या महंगा हो सकता है।
सैटेलाइट इंटरनेट को गृह मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार
संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी कहा कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया सुरक्षा मंजूरी के चरण में है। उनके अनुसार, दूरसंचार विभाग संबंधित कंपनियों को लाइसेंस और स्पेक्ट्रम से जुड़ी अस्थायी मंजूरियां दे चुका है, लेकिन परिचालन शुरू करने के लिए गृह मंत्रालय की अंतिम सुरक्षा मंजूरी जरूरी है।
पेम्मासानी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है। सभी संबंधित सेवा प्रदाताओं को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। मंजूरी मिलने के बाद ही कंपनियां अपनी सेवाएं शुरू कर सकेंगी।
सरकार ने भेदभाव के आरोपों को किया खारिज
एलन मस्क की ओर से भारतीय नियमों को लेकर उठाए गए सवालों के बीच सरकार ने भेदभावपूर्ण व्यवहार के आरोपों को खारिज किया है। संचार मंत्रालय के अनुसार, गैर-भूस्थिर उपग्रह नेटवर्क के जरिए ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) सेवाएं देने वाले तीन प्रदाताओं को लाइसेंस जारी किए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि सभी लाइसेंसधारकों के लिए नियामकीय और सुरक्षा संबंधी शर्तें समान हैं। इस मामले में आगे की प्रगति गृह मंत्रालय की सुरक्षा समीक्षा और संबंधित मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
आगे क्या होगा?
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत का रास्ता अब सुरक्षा मंजूरी और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है। मंजूरी मिलने पर कंपनियां अपनी सेवाएं शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। फिलहाल, सरकार का रुख यही है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहे और सभी कंपनियां राष्ट्रीय सुरक्षा तथा निर्धारित नियमों का पालन करें।