लोकसभा चुनाव के सात में से पांच चरण हो चुके हैं। जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ते जा रहे हैं नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता धर्म, जाति, भाषा और सुरक्षा के मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में कई बार नेता अपने भाषणों में ऐसे शब्दों का उपयोग कर जाते हैं जो काफी आपत्तिजनक होते हैं। ऐसे ही भाषणों को लेकर चुनाव आयोग ने कांग्रेस और बीजेपी अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है। जिसमें आयोग की तरफ से दोनों दलों के स्टार प्रचारकों को अपने भाषण में सही शब्दों को इस्तेमाल करने, सावधानी बरतने और मर्यादा बनाए रखने के लिए एक औपचारिक नोट जारी करने का निर्देश दिया गया है। चुनाव प्रचार में भाजपा के नेता जहां अपने भाषण में मुसलमान और धर्म पर जोर दे रहे हैं तो वहीं कांग्रेस नेता संविधान और अग्निवीर योजना के बारे में बार-बार बात कर रहे हैं। आयोग ने दोनों दलों के स्टार प्रचारकों को धार्मिक और सांप्रदायिक बयानबाजी न करने का निर्देश दिया है।
स्टार प्रचारक गलत बयान देने से बचें
चुनाव आयोग ने कांग्रेस से कहा कि उनके स्टार प्रचारक ऐसे बयान देने से बचें, जिनमें संविधान को खत्म करने और उस बेच देने जैसी बाते हों। इससे समाज में गलत धारणाएं पैदा हो सकती हैं। बता दें कि इस चुनाव में कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल गांधी अपने भाषणों में संविधान और अग्निवीर योजना को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं।Read More: कांग्रेस छोड़कर जानेवालों को दोबारा पार्टी में शामिल नहीं कराया जायेगा - केके मिश्रा
चुनाव आयोग ने भाजपा से अपने स्टार प्रचारकों और उम्मीदवारों के उन भाषणों पर रोक लगाने के लिए कहा है जिनसे समाज का बंटवारा हो सकता है। बता दें कि पीएम मोदी समेत बीजेपी के कई उम्मीदवार अपनी स्पीच में राम मंदिर और मुस्लिम समुदाय को लेकर विपक्ष पर हमलावर रहे हैं। इससे पहले 25 अप्रैल को भी चुनाव आयोग ने बीजेपी और कांग्रेस को एक-दूसरे के खिलाफ की गई शिकायतों के आधार पर नोटिस जारी किया था। जो कि आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों पर लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 के सेक्शन 77 के तहत जारी किया गया था। चुनाव आयोग से पीएम मोदी और राहुल गांधी की स्पीच में आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत की गई थी। जिसमें कहा गया कि ये नेता धर्म, जाति, समुदाय और भाषा के आधार पर लोगों को बांटने और उनके बीच नफरत पैदा करने का काम कर रहे हैं।
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