नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम जुड़ने के दावों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि केवल अनुमानों या मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर किसी तरह की जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता।
फॉर्म-6 से लाखों नाम जोड़ने का दावा
वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत के समक्ष मामला उठाते हुए कहा कि राज्य में फॉर्म-6 के जरिए करीब पांच से सात लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। फॉर्म-6 का इस्तेमाल आमतौर पर नए मतदाता का नाम दर्ज कराने या एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे में स्थानांतरण के लिए किया जाता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि तय समय सीमा के बाद इस प्रक्रिया की अनुमति नहीं होती, ऐसे में यह मामला चुनाव को प्रभावित कर सकता है।
कोर्ट ने कहा- पहले ठोस आधार लाएं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने इस पर कहा कि यदि इस मामले में कोई ठोस चुनौती पेश की जाती है तो अदालत विचार करेगी, लेकिन केवल संभावनाओं के आधार पर कार्रवाई संभव नहीं है। अदालत ने साफ कहा कि बिना ठोस तथ्यों के जांच की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
अभी अंतिम मतदाता सूची का इंतजार
अदालत में यह भी बताया गया कि अंतिम मतदाता सूची अभी जारी नहीं हुई है, जिससे पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट पहले से ही पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
दो चरणों में होगा मतदान
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल की तारीख तय की गई है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी।