नई दिल्ली. देश में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए रेहान हेल्थकेयर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया है। प्राधिकरण द्वारा हेल्थ सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स निर्माण इकाई के निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन सामने आए, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों के निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही को अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई उद्योग जगत के लिए भी एक सशक्त संदेश है कि गुणवत्ता और स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
निरीक्षण में उजागर हुईं गंभीर अनियमितताए
खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के निरीक्षण के दौरान निर्माण इकाई की स्थिति अत्यंत चिंताजनक पाई गई। निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार उत्पादन परिसर में व्यापक अव्यवस्था और अस्वच्छता मौजूद थी, जिससे खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए। निर्माण टैंकों के नीचे गंदगी और कीचड़ की मोटी परत जमी मिली, जबकि कच्चे माल का भंडारण भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं था। साफ-सफाई की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण परस्पर संदूषण का गंभीर जोखिम पाया गया, जिससे तैयार उत्पादों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है।
केवल 12 प्रतिशत अनुपालन ने बढ़ाई चिंता
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कंपनी की निर्माण इकाई को समग्र रूप से केवल 12 प्रतिशत अनुपालन अंक प्राप्त हुए। यह अत्यंत निम्न स्तर का अनुपालन खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन और नियामकीय मानकों की व्यापक अनदेखी को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी कम अनुपालन रेटिंग किसी भी खाद्य निर्माण इकाई के लिए अत्यंत गंभीर स्थिति मानी जाती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया जा रहा था।
बुनियादी ढांचे की खामियों ने बढ़ाया जनस्वास्थ्य का जोखिम
निरीक्षण के दौरान निर्माण इकाई के बुनियादी ढांचे में भी अनेक गंभीर कमियां सामने आईं। पर्याप्त भंडारण सुविधा का अभाव, सीमित कार्यक्षेत्र, अपर्याप्त वेंटिलेशन, कमजोर प्रकाश व्यवस्था, क्षतिग्रस्त संरचना, कीटों का प्रकोप तथा पेयजल की गुणवत्ता संबंधी वैध परीक्षण रिपोर्ट का अभाव प्रमुख कमियों में शामिल रहे। चूंकि इस इकाई में हेल्थ सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स जैसे ऐसे उत्पाद बनाए जाते हैं जिनका उपयोग बच्चों सहित विभिन्न संवेदनशील वर्गों द्वारा किया जाता है, इसलिए इन कमियों को जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर और तात्कालिक खतरे के रूप में देखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की परिस्थितियां उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
उत्पादन पर रोक, उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने कंपनी को निर्देश दिया है कि सभी कमियों को दूर कर सक्षम प्राधिकारी से अनुपालन का सत्यापन होने तक खाद्य कारोबार से जुड़ी सभी गतिविधियां तत्काल प्रभाव से बंद रखी जाएं। प्राधिकरण ने स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि यदि आदेश की अवहेलना कर उत्पादन या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखी गईं तो कंपनी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए नियमित निरीक्षण, कठोर नियामकीय निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। यह प्रकरण पूरे उद्योग के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों के निर्माण में गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन ही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।