नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषध नियमावली, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य फार्मास्युटिकल क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना और 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' के तहत जांच, परीक्षण और विश्लेषण के लिए कम मात्रा में दवाओं के आयात की प्रक्रिया को सरल बनाना है।
लाइसेंस की जगह लागू होगी पावती-आधारित प्रणाली
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, एनालिटिकल और नॉन-क्लिनिकल टेस्टिंग के लिए कम मात्रा में दवाओं के आयात हेतु एकनॉलेजमेंट-बेस्ड (पावती-आधारित) सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके तहत आवेदकों को केवल 'प्रायर इंटिमेशन फॉर्म' जमा करना होगा। पावती मिलने के बाद वे दवाओं का आयात कर सकेंगे और अलग से लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
इन दवाओं पर लागू नहीं होंगे नए नियम
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था निम्न श्रेणियों की दवाओं पर लागू नहीं होगी—
- सेक्स हार्मोन
- साइटोटॉक्सिक दवाएं
- बीटा-लैक्टम दवाएं
- जीवित सूक्ष्मजीवों वाले बायोलॉजिक्स
- नशीले एवं साइकोट्रोपिक पदार्थ
- इन दवाओं के आयात के लिए पहले की तरह लाइसेंस लेना अनिवार्य रहेगा।
रिसर्च, स्टार्टअप और उद्योग को मिलेगा फायदा
मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2026 में नई दवाएं और क्लिनिकल ट्रायल नियम, 2019 में संशोधन कर घरेलू टेस्ट लाइसेंस के लिए भी इसी तरह की अधिसूचना प्रणाली लागू की गई थी। अब इसे आयात प्रक्रिया तक विस्तारित किया जा रहा है।
इससे अनुसंधान एवं विकास (R&D) से जुड़े संस्थानों, स्टार्टअप्स और फार्मा उद्योग को कम मात्रा में दवाओं के आयात के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया से राहत मिलेगी और परीक्षण एवं विश्लेषण का काम अधिक तेजी से शुरू किया जा सकेगा।
हितधारकों से मांगे गए सुझाव
स्वास्थ्य मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। इच्छुक हितधारक अपने सुझाव और आपत्तियां मंत्रालय को डाक या ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं। मसौदा अधिसूचना राजपत्र में भी प्रकाशित कर दी गई है।