नई दिल्ली. देश के उत्तरी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रभाव लगातार मजबूत हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार आगामी चार से पांच दिनों के दौरान उत्तर भारत के अनेक राज्यों में व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा के साथ गरज-चमक, तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार मिल रही नमी तथा सक्रिय मानसूनी द्रोणिका के कारण वर्षा का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है।
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में अगले कई दिन रहेंगे बारिश वाले
दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आगामी दिनों तक रुक-रुक कर वर्षा होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा और कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आने और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी अगले कुछ दिनों तक वर्षा का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी 9 से 12 जुलाई के बीच अच्छी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह वर्षा खरीफ फसलों की बुवाई और प्रारंभिक वृद्धि के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है, हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पर निगरानी बनाए रखना आवश्यक होगा।
उत्तराखंड और हिमाचल में भूस्खलन का खतरा, यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह
पर्वतीय राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अगले कई दिनों तक भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में तेज वर्षा के साथ आकाशीय बिजली, तेज हवाओं और भूस्खलन की आशंका व्यक्त की है। विशेष रूप से चारधाम यात्रा मार्गों, पर्वतीय सड़कों और नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम की ताजा जानकारी प्राप्त करने के बाद ही यात्रा करने का आग्रह किया है। लगातार वर्षा के कारण संवेदनशील इलाकों में सड़क अवरुद्ध होने, चट्टानें गिरने और जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी बदलेगा मौसम का मिजाज
पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में मानसूनी गतिविधियां आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा तथा तेज हवाएं चल सकती हैं। पूर्वी राजस्थान में लगातार वर्षा का क्रम बना रहने का अनुमान है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी आंधी, तेज हवाओं और बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की गई है। लंबे समय से गर्मी और उमस झेल रहे इन क्षेत्रों में वर्षा से तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि शहरी क्षेत्रों में जलभराव और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी भारी वर्षा की संभावना
मध्य भारत में भी मानसून पूरी सक्रियता के साथ आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश के अनेक जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके साथ ही तेज हवाएं और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है। छत्तीसगढ़ में भी 8 से 11 जुलाई के बीच अनेक स्थानों पर अच्छी वर्षा होने का अनुमान है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह वर्षा धान सहित खरीफ की प्रमुख फसलों के लिए लाभदायक होगी, लेकिन जिन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की संभावना है वहां खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक रहेगा।
मौसम विभाग ने नागरिकों से बरतने को कहा विशेष एहतियात
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी नवीनतम चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। गरज-चमक और आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और विद्युत खंभों के निकट जाने से बचने की सलाह दी गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से परहेज करने, नदी-नालों के आसपास सावधानी बरतने तथा शहरी क्षेत्रों में जलभराव वाले मार्गों से बचने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की यह सक्रियता जहां एक ओर जल संसाधनों और कृषि के लिए लाभकारी है, वहीं दूसरी ओर अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सतर्कता और समय पर तैयारी ही संभावित जोखिमों को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय होगी।