आकलन वर्ष 2025–26 के लिए कुल करीब आठ करोड़ अस्सी लाख आयकर रिटर्न भरे गए थे। संसद में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक इनमें से लगभग चौबीस लाख रिटर्न नब्बे दिन से अधिक समय से लंबित पड़े हैं। रिटर्न भरने की आखिरी तारीख सोलह सितंबर थी, जिसे सरकार दो बार बढ़ा चुकी थी। इतने बड़े पैमाने पर दाखिल रिटर्न की जांच और प्रक्रिया पूरा करने में स्वाभाविक रूप से समय बढ़ गया है।
धारा 143(1) के तहत प्रक्रिया पूरी होने तक रिफंड नहीं
किसी भी करदाता को रिफंड तभी मिलता है जब उसकी दाखिल की गई जानकारी की प्रारंभिक जांच पूरी हो जाती है। यह प्रक्रिया आयकर अधिनियम की धारा 143(1) के तहत की जाती है। यदि पोर्टल पर ‘अंडर प्रोसेसिंग’ दिखाई देता है तो इसका सीधा अर्थ है कि विभाग ने अभी मूल जांच पूरी नहीं की है। यह जांच रिफंड जारी करने की अनिवार्य पहली शर्त है और इसमें थोड़ा समय लग सकता है।
डेटा की जांच में देरी एक प्रमुख कारण
कई रिटर्न ऐसे होते हैं जिनमें दर्ज विवरणों का मिलान करने में अधिक समय लगता है। करदाता की आय, स्रोत और अन्य सूचनाओं को विभिन्न माध्यमों से प्राप्त आंकड़ों से मिलाया जाता है। कहीं भी असमानता दिखाई देने पर विभाग को अतिरिक्त जांच करनी पड़ती है। यही प्रक्रिया रिफंड जारी होने की गति को धीमा कर देती है।
कटौतियों और टैक्स क्रेडिट की पुष्टि में समय
कुल आय की गणना करते समय करदाता द्वारा बताई गई कटौतियों और टैक्स क्रेडिट की भी पुष्टि करनी होती है। कटौती वह राशि है जिसे आपकी कुल आय में से घटाया जाता है ताकि कर देनदारी कम हो सके। निवेश, बीमा प्रीमियम, चिकित्सा खर्च या शिक्षा जैसी मदों पर दावा की गई कटौतियों के सही होने का सत्यापन अनिवार्य है। यदि किसी भी विवरण में स्पष्टता की कमी हो या दस्तावेज़ मेल नहीं खाते हों, तो प्रक्रिया लंबी हो जाती है और रिफंड रुक जाता है।
गलत विवरण या अधूरी सूचना भी रोक सकती है रिफंड
कई बार करदाता अनजाने में बैंक खाते का गलत विवरण, पैन और आधार के लिंक न होने, टीडीएस के रिकॉर्ड में अंतर या अन्य तकनीकी त्रुटियों के कारण भी देरी का सामना करते हैं। इन छोटी–छोटी गलतियों की वजह से भी विभाग को अतिरिक्त जांच करनी पड़ती है। इसलिए रिटर्न दाखिल करते समय दी गई हर जानकारी का सही होना बेहद आवश्यक है।
अब आपको क्या करना चाहिए
यदि आपका रिफंड अभी तक नहीं आया है, तो सबसे पहले ई–फाइलिंग पोर्टल पर रिटर्न की स्थिति देखिए। यदि ‘अंडर प्रोसेसिंग’ दिखे तो इसका अर्थ है कि मामला विभाग में लंबित है और आपको थोड़ा और इंतजार करना चाहिए। यदि किसी प्रकार की त्रुटि का संदेश मिलता है तो उसे तुरंत सुधारकर पुनः सबमिट करना जरूरी है। लंबे समय तक रिफंड न मिलने पर आप पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं या हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं।
Comments (0)