जबलपुर से भोपाल को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-45 पर शहपुरा के समीप रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर बना ब्रिज का एक हिस्सा रविवार शाम 5 बजे धंस गया। ब्रिज के धंसने के बाद मार्ग को बंद कर दिया गया है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा भोपाल जबलपुर नेशनल हाईवे 45 पर बना 400 करोड़ रुपये की लागत का ओवरब्रिज केवल तीन साल में ढह गया। यह घटना सिर्फ एक निर्माण विफलता नहीं, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है। जिस पुल को विकास का प्रतीक बताया गया था, वही आज मलबे में तब्दील होकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जानकारी के अनुसार पुल का लगभग 200 मीटर हिस्सा गिर गया। जिस लेन में पिछले छह महीनों से मरम्मत का काम चल रहा था, वही हिस्सा धराशायी हुआ। इसका सीधा अर्थ है कि संरचना में खामी पहले से मौजूद थी। इसके बावजूद यातायात जारी रहा। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि घटना स्थल से लगभग 50 मीटर के दायरे में नीचे रेलवे ट्रैक गुजरता है। यदि मलबा सीधे ट्रैक पर गिरता या उस समय कोई ट्रेन गुजर रही होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
निर्माण और निगरानी पर सवाल
तीन साल पहले निर्मित 400 करोड़ रुपये की इस परियोजना की गुणवत्ता पर अब गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। इतने कम समय में पुल का ढह जाना या तो निर्माण में भारी अनियमितता दर्शाता है या निगरानी तंत्र की विफलता को। यह जानना आवश्यक है कि निर्माण एजेंसी ने किन मानकों के तहत काम किया, गुणवत्ता जांच किस स्तर पर हुई और मरम्मत के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन क्यों नहीं सुनिश्चित किया गया।
अब तक जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है
यह राष्ट्रीय राजमार्ग भोपाल और जबलपुर जैसे दो प्रमुख शहरों को जोड़ता है। इसके प्रभावित होने से यातायात, व्यापार और आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ेगा। ऐसे में सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। जनता यह जानना चाहती है कि 400 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया, परियोजना की निगरानी किसके अधीन थी और अब तक जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
उच्चस्तरीय जांच कराए, दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई करे
यह घटना केवल एक पुल के ढहने की नहीं, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली है। यदि बुनियादी ढांचा तीन वर्ष में ही कमजोर साबित हो जाए, तो विकास के दावों की गंभीर समीक्षा आवश्यक हो जाती है। सरकार को चाहिए कि वह उच्चस्तरीय जांच कराए, दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस तंत्र विकसित करे।जनता की सुरक्षा और सार्वजनिक धन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि जिम्मेदारी तय हो और केवल आश्वासनों के बजाय ठोस कदम उठाए जाएं।
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