CM डॉ. मोहन यादव 23 फरवरी, सोमवार को हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में मुक्त करेंगे। इनमें चार Indian vulture और एक Cinereous vulture शामिल है। इन गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में अनुकूलन एवं अवलोकन अवधि के बाद छोड़ा जा रहा है। सभी पक्षियों को उच्च परिशुद्धता वाले GPS-GSM उपग्रह ट्रांसमीटर से टैग किया गया है, ताकि उनकी गतिविधियों और प्रवास पैटर्न की निगरानी की जा सके। टैगिंग प्रक्रिया वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों और वन विभाग की उपस्थिति में संपन्न हुई।
उपग्रह टेलीमेट्री से निगरानी
मध्यप्रदेश वन विभाग ने WWF-India और Bombay Natural History Society के सहयोग से गिद्धों की निगरानी के लिए सैटेलाइट टेलीमेट्री कार्यक्रम शुरू किया है।
टेलीमेट्री से प्राप्त डेटा के माध्यम से:
- गिद्धों के आवागमन और प्रवास मार्ग की जानकारी मिलेगी।
- भोजन और प्रमुख पड़ाव स्थलों की पहचान होगी।
- बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे खतरों की पहचान संभव होगी।
- विशेष रूप से, सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाईवे के तहत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पक्षी गलियारा है।
संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
मध्यप्रदेश में डेटा-आधारित और भूदृश्य-स्तरीय संरक्षण मॉडल विकसित किया जा रहा है। यह पहल न केवल लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों की रक्षा करेगी, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका को भी सुदृढ़ करेगी।
भारतीय परंपरा में गिद्धों को सम्मान और त्याग का प्रतीक माना गया है। रामायण में जटायु और सम्पाती की कथा इसका उदाहरण है। पर्यावरण में गिद्ध ‘प्रकृति के सफाईकर्मी’ के रूप में बीमारियों के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन दर्ज किया गया, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी संख्या मानी जा रही है।
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