भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए गर्मियों में बड़ी संख्या में लोग स्विमिंग पूल का रुख करते हैं। स्विमिंग शरीर को फिट रखने और गर्मी से बचने का अच्छा तरीका माना जाता है, लेकिन कई बार पूल का पानी आंखों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। स्विमिंग के बाद आंखों में लालपन, जलन, खुजली या सूखापन जैसी समस्याएं आम तौर पर देखने को मिलती हैं। आंखों में होने वाली परेशानी की वजह केवल पानी नहीं, बल्कि उसमें मौजूद क्लोरीन, बैक्टीरिया और गंदगी भी हो सकती है।
पूल में क्लोरीन का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
स्विमिंग पूल के पानी को साफ और कीटाणुरहित रखने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है। यह बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करने में मदद करता है, जिससे पानी संक्रमण से सुरक्षित रहता है। हालांकि डॉक्टरों के मुताबिक, अगर क्लोरीन की मात्रा अधिक हो जाए तो यह आंखों की बाहरी सुरक्षा परत यानी टियर फिल्म को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे आंखों में जलन, चुभन और लालपन की समस्या हो सकती है। सही मात्रा में क्लोरीन मिला साफ पानी सामान्य तौर पर सुरक्षित माना जाता है।
गंदा पानी बढ़ा सकता है संक्रमण का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्विमिंग पूल की साफ-सफाई ठीक तरीके से न की जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गंदे पानी में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस मौजूद हो सकते हैं, जो आंखों में इंफेक्शन, एलर्जी और कंजंक्टिवाइटिस जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोगों और संवेदनशील आंखों वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
स्विमिंग करते समय आंखों की सुरक्षा कैसे करें?
डॉक्टरों के अनुसार स्विमिंग के दौरान स्विमिंग गॉगल्स पहनना आंखों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। गॉगल्स आंखों को क्लोरीन और गंदे पानी के सीधे संपर्क से बचाते हैं। इसके अलावा स्विमिंग के बाद आंखों को साफ पानी से धोना भी जरूरी माना जाता है, ताकि केमिकल्स और गंदगी पूरी तरह हट सके।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर स्विमिंग के बाद आंखों में लगातार जलन, धुंधला दिखाई देना, दर्द, अत्यधिक लालपन या सूजन महसूस हो तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर समस्या गंभीर हो सकती है।