मध्य प्रदेश के अन्नदाता इस समय कुदरत की मार से गहराई तक प्रभावित हुए हैं। राज्य के 25 जिलों में हाल ही में हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को भारी क्षति पहुंचाई है। गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों पर इसका सीधा असर पड़ा है, जिससे किसानों की मेहनत और उम्मीदें दोनों पर पानी फिर गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की थी, ऐसे में अधिकारियों के लापरवाह रवैये को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
तेज हवाओं ने और बिगाड़ी स्थिति
जहां बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, वहीं कई जिलों में तेज हवाओं ने हालत को और खराब कर दिया। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार लगभग 63 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी के कारण गेहूं और सरसों की फसलें खेतों में आड़ी हो गईं। मालवा–निमाड़ और ग्वालियर अंचल के कई इलाकों में फसलें पूरी तरह से जमीन पर गिर गईं, जिससे उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश, सर्वे और राहत कार्य तेज
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तत्काल संज्ञान लेकर सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र में फसल नुकसान का सर्वे अनिवार्य रूप से कराया जाए और कोई भी किसान राहत प्रक्रिया से वंचित न रहे। राज्य सरकार ने पहले ही प्रभावित जिलों को राज्य राहत कोष (एसआरएफ) से राशि जारी करना शुरू कर दिया है, ताकि मुआवजे और फसल बीमा लाभ की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
किसानों की परेशानियां और सरकारी तैयारिया
गांवों से आ रही तस्वीरें और रिपोर्टें बताती हैं कि किसानों की कठिनाइयां लगातार बढ़ रही हैं। कई क्षेत्रों में सरसों की फसल के फूल झड़ गए हैं और गेहूं की बालियां बारिश से काली पड़ने लगी हैं। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खेतों का भौतिक निरीक्षण करें, नुकसान का सही आकलन तैयार करें और किसानों को मुआवजा देने में किसी भी तरह की देरी न हो। कृषि विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें कई जिलों में सर्वे शुरू कर चुकी हैं।
राहत राशि वितरण को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री यादव ने यह भी कहा है कि राहत राशि वितरण में पारदर्शिता और तेजी सबसे जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी किसान सर्वे से छूटना नहीं चाहिए और मुआवजा समय पर प्रत्येक पात्र किसान तक पहुंचे। राज्य सरकार का दावा है कि प्रभावित किसानों को फसल बीमा योजना और राहत राशि दोनों का लाभ प्राथमिकता पर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि किसानों की मौजूदा आर्थिक स्थिति में तत्काल मदद पहुंच सके।
बड़े पैमाने पर कृषि संकट की आशंका
मध्य प्रदेश के 25 जिलों में व्यापक नुकसान के कारण प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो रबी सीजन का कुल उत्पादन काफी नीचे जा सकता है। राज्य सरकार लगातार मौसम विभाग से संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत उपायों की घोषणा भी की जा सकती है।
Comments (0)