देश में सोना और चांदी एक बार फिर तेज उछाल के साथ नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। 23 फरवरी को घरेलू बाजार में चांदी की कीमत में लगभग पंद्रह हजार रुपये की तेज छलांग ने निवेशकों को चौंका दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी लगभग दो लाख अड़सठ हजार रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई, जबकि सोना लगभग एक लाख उनसठ हजार नौ सौ रुपये प्रति दस ग्राम तक जा पहुंचा। यह तेजी दिखाती है कि वैश्विक आर्थिक हलचलें घरेलू कमोडिटी बाजार को किस तरह प्रभावित कर रही हैं।
वैश्विक तनाव और टैरिफ नीति का भारतीय बाजार पर प्रभाव
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा वैश्विक टैरिफ बढ़ाने की घोषणा से दुनिया भर के बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है। टैरिफ नियमों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के माहौल को अस्थिर कर दिया, जिसके चलते निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बनाकर सोने और चांदी की ओर रुख किया। विदेशी बाजारों में उपजे इस डर का सीधा असर भारत के कमोडिटी बाजार पर पड़ा और बहुमूल्य धातुओं में अचानक आई यह तेजी निवेश की रणनीतियों में बदलाव का संकेत दे रही है।
घरेलू बाजार में मांग, शादियों का मौसम और उपभोक्ता की उलझन
दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े शहरों में 22 और 24 कैरेट सोने के दाम बढ़ने के साथ उपभोक्ताओं के सामने बड़ा सवाल यह है कि क्या अभी गहने खरीदे जाएं या कीमतों के स्थिर होने का इंतजार किया जाए। शादियों के मौसम में सोने की मांग बढ़ जाती है, लेकिन कीमतों की इस भारी उछाल ने कई परिवारों को सतर्क कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार अथवा टैरिफ नीति में किसी नरमी के संकेत मिलने तक कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
सरकार ने आयात पर जताई निश्चिंतता, स्थिति नियंत्रित
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह स्पष्ट किया कि सोने और चांदी का आयात अभी खतरनाक स्तर पर नहीं पहुंचा है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर के अनेक केंद्रीय बैंक बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, जिससे कीमतों में असामान्य उछाल देखा जा रहा है। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि भारतीय रिज़र्व बैंक आयात डेटा पर लगातार नजर रख रहा है और फिलहाल स्थिति संतुलित है। अंतरराष्ट्रीय खरीदारी का यह चलन कीमतों को ऊपर ले जा रहा है, पर घरेलू वित्तीय प्रबंधन अभी सुरक्षित दायरे में है।
रिज़र्व बैंक का भरोसा और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर मल्होत्रा ने भी देश की आर्थिक स्थिति पर विश्वास व्यक्त किया है। उनके अनुसार बाहरी क्षेत्र की स्थिति मजबूत है और चालू खाता घाटा प्रबंधन के दायरे में बना हुआ है। जब तक यह संतुलन बना है, तब तक सोने का आयात भारतीय अर्थव्यवस्था को किसी बड़े खतरे में नहीं डालता। यह बयान आम निवेशकों के लिए इस संदेश के समान है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित है, पर भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत बनी हुई है।
आगे कीमतें किस दिशा में जाएंगी
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा तेजी पूरी तरह वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मनोवृति के कारण है। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य हुए या टैरिफ नीतियों में नरमी आई, तो कीमतों में कुछ स्थिरता संभव है। लेकिन यदि तनाव बढ़ता है, तो सोना और चांदी नई ऊंचाइयां भी छू सकते हैं। इसलिए सावधान निवेश और बाजार की परिस्थितियों पर निरंतर नजर रखना मौजूदा समय की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है।
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