महिला अपराध से जुड़े मामलों में तेजी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब राज्य के सभी जिलों की प्रतिमाह ग्रेडिंग की जा रही है। यह ग्रेडिंग महिला अपराध से जुड़े मामलों के निपटारे की स्थिति के आधार पर तय की जाएगी, जिससे जिलों में कार्यप्रणाली को बेहतर बनाया जा सके।
जिलों को भेजी जा रही है ग्रेडिंग रिपोर्ट
पुलिस मुख्यालय द्वारा तैयार की गई ग्रेडिंग रिपोर्ट हर माह संबंधित जिलों को भेजी जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर है, वे समय रहते सुधारात्मक कदम उठा सकें। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को हरे रंग और खराब प्रदर्शन वाले जिलों को लाल रंग में चिन्हित किया जा रहा है। कमजोर जिलों के पुलिस अधिकारियों से सुधार को लेकर सीधे संवाद भी किया जा रहा है।
गुम बालिकाओं की तलाश को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
गुमशुदा बालिकाओं की तलाश को पुलिस मुख्यालय ने सबसे अहम मापदंड माना है। ऐसे जिले जो पांच साल या उससे अधिक समय से गुम बालिकाओं की खोज में प्रभावी कार्य कर रहे हैं, उन्हें ग्रेडिंग में अतिरिक्त अंक दिए जा रहे हैं। इस व्यवस्था से जिलों में गुमशुदा मामलों को गंभीरता से लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
60 दिन में चालान पेश करने पर विशेष निगरानी
भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज एफआईआर के मामलों में यह देखा जा रहा है कि 60 दिनों के भीतर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जा रहा है या नहीं। इस बिंदु पर नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि महिला अपराध मामलों में अनावश्यक देरी रोकी जा सके और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
भरण-पोषण और वारंट तामीली भी ग्रेडिंग में शामिल
ग्रेडिंग का तीसरा महत्वपूर्ण आधार न्यायालय द्वारा पीड़ित महिलाओं को दिए गए भरण-पोषण के आदेशों का पालन है। यह जांच की जा रही है कि संबंधित महिलाओं को वास्तव में भरण-पोषण की राशि मिल रही है या नहीं। साथ ही, लंबित वारंटों की तामीली पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भोपाल में ही एक मामले में चार साल से लंबित वारंट को तामील कराया गया है।
ग्रेडिंग से दिखने लगे सकारात्मक परिणाम
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इस नई ग्रेडिंग व्यवस्था से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। गुम बालिकाओं की तलाश में तेजी आई है और जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित हुई है। आने वाले समय में महिला अपराधों के अलावा अन्य गंभीर अपराधों को भी इस ग्रेडिंग प्रणाली में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में यह नई पहल जिलों की जवाबदेही तय करने और कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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