मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सहरिया विकास प्राधिकरण की तर्ज पर भील आदिवासी विकास प्राधिकरण के गठन की मांग से सियासत गरमा गई सैलाना विधायक कमलेश डोडियार ने सदन में कहा कि विकास के अवसरों से वंचित भील जनजाति लगातार पिछड़ती जा रही है। डोडियार ने बताया कि भील आदिवासी समुदाय में सामाजिक-आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और कुपोषण जैसी समस्याएं गंभीर हैं। इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक समर्पित विकास प्राधिकरण की सख्त आवश्यकता है, जो योजनाबद्ध तरीके से काम करे। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी मध्यप्रदेश के , , और जिलों सहित , और में रहने वाले भील आदिवासी कुपोषण, अशिक्षा, बेरोजगारी,पलायन और विस्थापन की समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सामुदायिक और केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, बुनियादी ढांचे और आजीविका के अवसरों पर एकसाथ काम करना जरूरी है।
कार्यक्षेत्र और लाभ
भील आदिवासी विकास प्राधिकरण के गठन से उपरोक्त जिलों में रहने वाले भील समुदाय का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। सहरिया विकास प्राधिकरण की तर्ज पर इस प्राधिकरण के माध्यम से गरीब और वंचित परिवारों को पक्के आवास, गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं तथा महिलाओं और बेरोजगार आदिवासी युवाओं को आजीविका और रोजगार के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जा सकेगा।
संरचना और क्रियान्वयन
डोडियार ने कहा कि भील जनजाति विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों की तरह ही स्थिति में है। इसलिए प्रस्तावित प्राधिकरण में अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के साथ-साथ पर्याप्त बजट और संसाधन समय-समय पर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। विकास योजनाओं की नियमित निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन से ही भील आदिवासी समाज का वास्तविक उत्थान संभव होगा।
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