नई दिल्ली. भारत के सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर राजस्थान के कोटा जिले स्थित मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे बनाई गई लगभग 4.9 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यह भारत की पहली ऐसी आठ-लेन राजमार्ग सुरंग है, जिसे विशेष रूप से वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक परिवहन व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। अगस्त महीने में इसके औपचारिक संचालन की संभावना है, जिससे देश की सड़क अवसंरचना को एक नई पहचान मिलेगी।
बाघों की सुरक्षा के साथ तेज रफ्तार सफर का अनोखा मॉडल
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राजमार्ग को बाघ अभयारण्य के प्राकृतिक आवास के नीचे से गुजारा गया है ताकि वन्यजीवों की आवाजाही, उनके प्राकृतिक व्यवहार और पारिस्थितिकी तंत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। सामान्य परिस्थितियों में राजमार्ग वन्यजीवों के लिए बड़ी बाधा बन सकते हैं, लेकिन इस सुरंग ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित समाधान प्रस्तुत किया है। विशेषज्ञ इसे भारत में पर्यावरण-अनुकूल आधारभूत संरचना विकास का उत्कृष्ट उदाहरण मान रहे हैं, जो भविष्य की परियोजनाओं के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।
अभी चल रहा है सुरक्षा परीक्षण, हर व्यवस्था की हो रही जांच
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल सुरंग में केवल कारों और आपातकालीन वाहनों के माध्यम से परीक्षण किए जा रहे हैं। सुरंग के भीतर संचार व्यवस्था, मोबाइल नेटवर्क, अग्नि सुरक्षा प्रणाली, वेंटिलेशन, प्रकाश व्यवस्था, निगरानी प्रणाली तथा आपदा प्रबंधन तंत्र का व्यापक परीक्षण लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी सुरक्षा मानक पूरी तरह संतोषजनक नहीं पाए जाते, तब तक भारी वाहनों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक तकनीकी प्रणाली का बार-बार परीक्षण किया जा रहा है।
विश्वस्तरीय तकनीक से लैस होगी सुरंग
यह सुरंग आधुनिक सुरक्षा और संचालन सुविधाओं से सुसज्जित की गई है। इसके भीतर अत्याधुनिक वेंटिलेशन प्रणाली, अग्निशमन उपकरण, सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन निकास मार्ग, संचार प्रणाली तथा त्वरित राहत एवं बचाव व्यवस्था विकसित की गई है। सुरंग के दोनों ट्यूबों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की तकनीकी सुविधाएं भारतीय राजमार्ग परियोजनाओं को वैश्विक मानकों के और करीब ले जाएंगी।
परिवहन और पर्यावरण संरक्षण दोनों को मिलेगा लाभ
अगस्त में सभी श्रेणी के वाहनों के लिए सुरंग खुलने के बाद दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर यात्रा और अधिक सुगम, सुरक्षित तथा तेज हो जाएगी। इसके साथ ही मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र भी सुरक्षित रहेगा। पर्यावरणविदों का मानना है कि विकास परियोजनाओं में इस प्रकार की तकनीकी सोच भविष्य में वन्यजीव संरक्षण और आधारभूत संरचना निर्माण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रभावी मॉडल बन सकती है। यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक इंजीनियरिंग, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को साथ लेकर भी आगे बढ़ा जा सकता है।