मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े संगठित अपराध के खिलाफ देश में एक व्यापक और लंबे समय तक चलने वाली कार्रवाई की योजना तैयार की गई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने राज्यों तथा नशा विरोधी अपराधों से निपटने वाली विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों को विशेष अभियान चलाने के लिए कहा है। इस कार्ययोजना के तहत सितंबर से शुरू होकर अगले वर्ष अगस्त तक अलग-अलग विषयों पर विशेष प्रवर्तन और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार इस रणनीति का उद्देश्य केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति, वितरण और वित्तीय नेटवर्क से जुड़े पूरे तंत्र को निशाने पर लेना है।
24 विशेष अभियानों के जरिए कसेगा तस्करी नेटवर्क पर शिकंजा
प्रस्तावित कार्ययोजना में कुल 24 अलग-अलग विशेष अभियान शामिल किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक अभियान लगभग एक पखवाड़े तक चलने की योजना है। इन अभियानों को अलग-अलग चरणों में लागू कर देशभर में मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों के विभिन्न पहलुओं पर कार्रवाई की जाएगी। राज्यों की पुलिस, केंद्र की संबंधित एजेंसियों और नशा विरोधी इकाइयों के बीच समन्वय को इस योजना का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। लंबे समय तक लगातार अभियान चलाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्रवाई केवल किसी एक क्षेत्र या सीमित अवधि तक केंद्रित न रहे, बल्कि तस्करी के अलग-अलग मार्गों और नेटवर्क की पहचान कर उन पर व्यवस्थित दबाव बनाया जा सके।
सितंबर में विदेशी अपराधियों और फरार आरोपियों पर विशेष नजर
सितंबर से शुरू होने वाले प्रवर्तन अभियानों में उन विदेशी नागरिकों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनके नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों में शामिल होने की जानकारी सामने आती है। कार्ययोजना के अनुसार ऐसे मामलों में कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई करते हुए निर्वासन की प्रक्रिया पर भी काम किया जा सकता है। इसके बाद लगभग 15 दिनों का विशेष अभियान फरार मादक पदार्थ अपराधियों को पकड़ने के लिए चलाया जाएगा। लंबे समय से कानून की पकड़ से दूर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना इस चरण की प्रमुख प्राथमिकता होगी, ताकि तस्करी नेटवर्क के सक्रिय और महत्वपूर्ण सदस्यों तक पहुंच बनाई जा सके।
अक्टूबर से मेडिकल दुकानों और औषधि वितरण व्यवस्था की जांच
अक्टूबर से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की नशा विरोधी कार्यबल इकाइयों के साथ मिलकर मेडिकल दुकानों और औषधि विक्रेताओं की विशेष जांच कर सकता है। इस कार्रवाई में संबंधित क्षेत्रों के औषधि नियंत्रकों के साथ समन्वय किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य वैध औषधियों के अवैध रूप से नशीले पदार्थों के कारोबार में इस्तेमाल या उनकी आपूर्ति को दूसरी दिशा में मोड़े जाने की संभावनाओं की जांच करना है। कुछ दवाओं का दुरुपयोग नशे के लिए किए जाने की आशंका के मद्देनजर औषधि वितरण श्रृंखला की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के दौरान संबंधित नियमों और रिकॉर्ड की समीक्षा के साथ संदिग्ध गतिविधियों की पहचान पर भी ध्यान दिया जाएगा।
फरार अपराधियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने की योजना
कार्ययोजना के अगले चरणों में मादक पदार्थ अपराधों से जुड़े फरार आरोपियों और भगोड़ों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा। ऐसे मामलों में विभिन्न राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के पास उपलब्ध सूचनाओं को व्यवस्थित करने से अपराधियों के संभावित ठिकानों, संपर्कों और तस्करी नेटवर्क के बारे में बेहतर जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है। नशीले पदार्थों का कारोबार अक्सर राज्य और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा होता है, इसलिए किसी एक एजेंसी के स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। व्यापक सूचना साझा करने और समन्वित जांच के जरिए फरार आरोपियों तक पहुंच बनाने की संभावना मजबूत हो सकती है।
तटीय समुदायों को समुद्री तस्करी के प्रति किया जाएगा जागरूक
योजना में समुद्री मार्गों से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ तटीय समुदायों को जागरूक करने का भी प्रावधान रखा गया है। भारत की लंबी समुद्री सीमा और अनेक बंदरगाहों के कारण समुद्री सुरक्षा नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सतर्क करने से सुरक्षा एजेंसियों को स्थानीय स्तर पर उपयोगी सूचनाएं मिल सकती हैं। समुद्री मार्गों के माध्यम से होने वाली अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्थानीय समुदायों, तटरक्षक संस्थाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक माना जाता है।
दिसंबर में जमीन, समुद्र और हवाई मार्गों पर समन्वित जांच
कार्ययोजना के अनुसार दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में जमीन, समुद्र और हवाई मार्गों पर समन्वित जांच अभियान चलाने की योजना है। देश के विभिन्न प्रवेश और निकास बिंदुओं पर नशीले पदार्थों की तस्करी की संभावनाओं को देखते हुए हवाई अड्डों, समुद्री मार्गों और स्थलीय सीमाओं पर कार्रवाई तेज की जा सकती है। इस अभियान में संबंधित सुरक्षा और जांच एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा। तस्करी के तरीके लगातार बदलते रहते हैं और अपराधी विभिन्न परिवहन माध्यमों तथा मार्गों का इस्तेमाल कर सकते हैं, इसलिए बहुस्तरीय जांच व्यवस्था को इस राष्ट्रीय रणनीति का आवश्यक हिस्सा माना जा रहा है।
अवैध खेती और रासायनिक पदार्थों के दुरुपयोग पर भी कार्रवाई
जनवरी 2027 के दूसरे पखवाड़े में अवैध रूप से उगाई जा रही नशीली फसलों की पहचान और उन्हें नष्ट करने के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना है। इसके बाद फरवरी के पहले पखवाड़े में रासायनिक उद्योगों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर उन रासायनिक पदार्थों के संभावित दुरुपयोग को रोकने पर ध्यान दिया जाएगा, जिनका इस्तेमाल नशीले पदार्थ तैयार करने में किया जा सकता है। वैध औद्योगिक उपयोग और अवैध गतिविधियों के बीच अंतर बनाए रखने के लिए संबंधित उद्योगों और एजेंसियों के बीच सतर्कता तथा सूचना साझा करना महत्वपूर्ण होगा। इस चरण का उद्देश्य उत्पादन से पहले की कड़ी पर निगरानी बढ़ाकर अवैध तस्करी नेटवर्क की क्षमता को सीमित करना है।
फरवरी के दूसरे चरण में जेलों की होगी संयुक्त जांच
फरवरी के दूसरे पखवाड़े में जेलों की संयुक्त जांच का भी प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कारागारों के भीतर से नशीले पदार्थों की आपूर्ति, संपर्क या आपराधिक गतिविधियों का कोई नेटवर्क संचालित न हो सके। जेलों में बंद अपराधियों के बाहरी नेटवर्क से संभावित संपर्क और प्रतिबंधित वस्तुओं की आवाजाही की जांच के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई की जा सकती है। संगठित अपराध के मामलों में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती और हिरासत में मौजूद आरोपियों के संभावित नेटवर्क पर भी निगरानी आवश्यक रहती है।
स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान भी जारी
नशे के खिलाफ प्रस्तावित रणनीति में केवल कानून प्रवर्तन ही नहीं, बल्कि जागरूकता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। 16 अगस्त से स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों, कानूनी परिणामों और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक करना नशे के खिलाफ दीर्घकालिक लड़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शिक्षा संस्थानों में जागरूकता बढ़ने से नशे की मांग को कम करने और छात्रों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों से बचाने में सहायता मिल सकती है।
तस्करी के पूरे तंत्र को तोड़ने की दिशा में बड़ी रणनीति
यह वर्षभर चलने वाली कार्ययोजना इस बात का संकेत देती है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को अलग-अलग स्तरों पर एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, औषधि दुकानों की जांच, सीमाओं और बंदरगाहों की निगरानी, अवैध खेती के खिलाफ कार्रवाई, रासायनिक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम और जेलों की जांच जैसे कदम तस्करी नेटवर्क की विभिन्न कड़ियों को निशाना बनाते हैं। यदि राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय बना रहा, तो यह अभियान नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े संगठित नेटवर्क पर व्यापक दबाव बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।