नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में 6 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान में हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के लिए 6 सितंबर को भारी वर्षा का संकेत दिया गया है। इससे निचले इलाकों में जलभराव और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। शनिवार को हुई बारिश के बाद राजधानी के कई हिस्सों में पानी जमा होने और यातायात की रफ्तार प्रभावित होने की स्थिति सामने आई थी। ऐसे में अगले दिन बारिश का एक और दौर आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में 6 सितंबर के बाद तत्काल भारी बारिश की चेतावनी नहीं है, लेकिन मौसम में बदलाव बना रह सकता है। आसपास के क्षेत्रों में बारिश होने पर दिल्ली की सड़कों और निचले इलाकों में इसका असर दिखाई दे सकता है। यात्रियों को विशेष रूप से सुबह और शाम के समय यातायात की स्थिति पर नजर रखनी होगी। जलभराव वाले मार्गों पर अनावश्यक आवाजाही से बचना भी बेहतर रहेगा। मौसम की स्थिति में अचानक बदलाव होने पर स्थानीय चेतावनियों को प्राथमिकता देना जरूरी होगा।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी बारिश का दौर
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 6 से 8 सितंबर तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6 सितंबर को भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। उत्तराखंड में 6 और 7 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की स्थिति बन सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क अवरोध का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वालों को मौसम और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उत्तराखंड के लिए मौसम विभाग ने 6 सितंबर के बाद भी कुछ दिनों तक वर्षा गतिविधि बने रहने का संकेत दिया है। 10 और 11 सितंबर को भी राज्य में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। लगातार नमी और बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों पर जोखिम बढ़ सकता है। नदी-नालों और संवेदनशील इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। प्रशासन द्वारा जारी स्थानीय चेतावनी की स्थिति में सुरक्षित स्थान की ओर जाने में देरी नहीं करनी चाहिए।
राजस्थान में भारी बारिश का असर
पूर्वी राजस्थान में 5 सितंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी के बाद 6 सितंबर को भी गरज-चमक और तेज मौसम गतिविधि की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार इस क्षेत्र में बनी मौजूदा मौसम प्रणाली के प्रभाव से वर्षा गतिविधि सक्रिय रह सकती है। भारी बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने और स्थानीय यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और जल निकासी व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।
राजस्थान के मौसम में बदलाव का संबंध उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और मानसूनी द्रोणिका की स्थिति से भी है। 5 सितंबर के मौसम बुलेटिन के अनुसार उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे लगे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर निम्न दबाव क्षेत्र बना हुआ है। इसके कारण आसपास के राज्यों में नमी और वर्षा गतिविधि को बढ़ावा मिल रहा है। मौसम प्रणाली की स्थिति में बदलाव के साथ बारिश का क्षेत्र और तीव्रता भी बदल सकती है।
मध्य प्रदेश में भी सक्रिय रहेगा मानसून
मध्य प्रदेश में पिछले दिनों सक्रिय रही मौसम प्रणाली का असर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे लगे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर निम्न दबाव क्षेत्र मौजूद है और इसके साथ ऊंचाई तक चक्रवाती परिसंचरण भी जुड़ा है। यह प्रणाली अगले 24 घंटे में लगभग स्थिर रह सकती है। इसके कारण मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है।
मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है और मौसम प्रणाली के कमजोर पड़ने के बावजूद नमी का प्रभाव बना हुआ है। विशेष रूप से पश्चिमी हिस्सों में मौसम गतिविधि पर नजर रखना जरूरी होगा। भारी वर्षा की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकासी संबंधी परेशानी पैदा हो सकती है। किसानों के लिए खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करना उपयोगी रहेगा। स्थानीय मौसम चेतावनी के आधार पर ही यात्रा और बाहरी गतिविधियों की योजना बनाना बेहतर होगा।
बिहार से पूर्वोत्तर तक बारिश का विस्तार
बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी आने वाले दिनों में वर्षा गतिविधि बनी रहने का अनुमान है। पूर्वी भारत में सक्रिय मौसम प्रणालियों और मानसूनी प्रवाह के कारण कई स्थानों पर बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है और कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक की स्थिति लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। पहाड़ी और नदी किनारे के इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय चेतावनियों को गंभीरता से लेना होगा।
मौसम विभाग के विस्तारित पूर्वानुमान में सितंबर के दूसरे सप्ताह के शुरुआती हिस्से में पूर्वी और पूर्वोत्तर प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में वर्षा गतिविधि बढ़ने की संभावना भी जताई गई है। बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे लगे उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक नया ऊपरी वायु परिसंचरण बनने की संभावना बताई गई है। इसके प्रभाव से आगे चलकर निम्न दबाव क्षेत्र विकसित हो सकता है और पूर्वी भारत में बारिश बढ़ सकती है। इससे संकेत मिलता है कि मानसून की गतिविधि अभी कई क्षेत्रों में बनी रहने वाली है।
तेज हवाएं और बिजली गिरने का भी खतरा
भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं भी कई क्षेत्रों में खतरा बढ़ा सकती हैं। उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों के लिए मौसम विभाग ने बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। खुले मैदान, खेत और पेड़ों के नीचे मौजूद लोगों के लिए ऐसी स्थिति विशेष रूप से जोखिमपूर्ण हो सकती है। मौसम खराब होने पर सुरक्षित भवन के भीतर रहना और खुले स्थानों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
भारी बारिश का असर केवल जलभराव तक सीमित नहीं रहता। अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क और रेल यातायात में बाधा, पेड़ों के गिरने तथा कमजोर ढांचों को नुकसान जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। शहरों में नालियों की क्षमता से अधिक पानी आने पर यातायात और जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में अतिरिक्त पानी फसलों के लिए भी चुनौती बन सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना सबसे सुरक्षित विकल्प रहेगा।
6 सितंबर को कैसा रहेगा देश का मौसम?
6 सितंबर को उत्तर भारत के कई राज्यों में मानसून सक्रिय रहने वाला है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड में बारिश की चेतावनी जारी है, जबकि पूर्वी राजस्थान में भी मौसम गतिविधि बनी रहेगी। मध्य प्रदेश में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र का असर दिखाई दे सकता है और पूर्वी भारत तथा पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
मौसम की यह स्थिति बताती है कि मानसून अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है और सितंबर के शुरुआती दिनों में कई क्षेत्रों को भारी बारिश से राहत नहीं मिलने वाली। लोगों को विशेष रूप से जलभराव, बिजली गिरने और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन जैसे जोखिमों को ध्यान में रखना चाहिए। किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना होगा, जबकि यात्रियों को मौसम और मार्ग की ताजा स्थिति देखकर ही यात्रा करनी चाहिए। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना सुरक्षित रहेगा।