वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारत का दबदबा और 10 साल की छलांग
अंतर्राष्ट्रीय नौवहन संगठन बीआईएमसीओ और इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग (BIMCO-ICS) द्वारा जारी 'सीफॉरर वर्कफोर्स रिपोर्ट 2026' के अनुसार, भारत वैश्विक मर्चेंट नेवी को नाविकों और नौवहन पेशेवरों की आपूर्ति करने के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। भारत ने चीन, रूस और इंडोनेशिया जैसे दिग्गज नौवहन देशों को पछाड़कर यह स्थान हासिल किया है और अब केवल फिलीपींस ही भारत से आगे है। यह मुकाम भारत के समुद्री क्षेत्र में बीते एक दशक में आए क्रांतिकारी बदलाव को रेखांकित करता है। वर्ष 2015 में वैश्विक समुद्री कार्यबल में भारत का योगदान केवल 5.2% था और वह पांचवें पायदान पर था। 2021 में भारत का शेयर मामूली रूप से बढ़कर 6% हुआ। हालांकि, नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत की हिस्सेदारी दोगुनी से भी अधिक बढ़कर 12.16% हो गई है, जिसमें देश के कुल 3,11,936 समुद्री पेशेवर अंतर्राष्ट्रीय जहाजों पर तैनात हैं।
कुशल ऑफिसर्स कैडर में भारत की मजबूत स्थिति
वैश्विक शिपिंग उद्योग में कुशल ऑफिसर्स की भारी मांग के बीच भारत सबसे विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरा है। वर्तमान में भारत 1,40,718 शिप ऑफिसर्स (वैश्विक ऑफिसर कार्यबल का 13.41%) और 1,71,218 रेटिंग्स पेशेवरों (11.29%) की आपूर्ति कर रहा है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि दुनिया भर में सीफॉरर्स की कुल आपूर्ति 25.7 लाख और मांग 25.5 लाख है। वैश्विक स्तर पर योग्य मर्चेंट नेवी अधिकारियों की कमी को देखते हुए भारतीय पेशेवरों की मांग में लगातार भारी इजाफा देखा जा रहा है।
केंद्रीय मंत्रालय का 'मिशन 20% और सुरक्षा उपाय
केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए 'मिशन 20%' की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय योजना का लक्ष्य मौजूदा दशक के अंत तक वैश्विक सीफॉरर कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी को 12.16% से बढ़ाकर 20% तक पहुंचाना है, यानी दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों पर तैनात हर पांचवां नाविक भारतीय हो। इसके तहत समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता विस्तार, डिजिटल लाइसेंसिंग और महिला नाविकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दूसरी ओर, लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और ब्लैक सी जैसे तनावग्रस्त व युद्ध-प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) और नौवहन महानिदेशालय (DG Shipping) लगातार निगरानी रख रहे हैं।