भारतीय रेलवे ने रेल इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड ने प्राइवेट साइडिंग परियोजनाओं से जुड़े कंसल्टेंट्स (सलाहकारों) के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाते हुए देशभर में एकीकृत व्यवस्था लागू कर दी है। अब किसी भी एक रेलवे जोन में रजिस्ट्रेशन कराने वाले कंसल्टेंट को सभी जोनों में काम करने के लिए अलग-अलग पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।
रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला, देशभर में मिलेगी मान्यता
रेलवे बोर्ड ने 18 जून 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया है। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सिविल इंजीनियरिंग) अजीत कुमार झा द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, यदि कोई कंसल्टेंट भारतीय रेलवे के किसी एक जोन में पंजीकृत है, तो उसे पूरे देश के सभी रेलवे जोनों में कार्य करने के लिए पात्र माना जाएगा। पहले अलग-अलग जोनों में काम करने के लिए हर स्थान पर नया पंजीकरण कराना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। नई व्यवस्था से इस प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया गया है।
तीन साल तक रहेगा रजिस्ट्रेशन मान्य
नई व्यवस्था के तहत यह मान्यता तीन वर्षों तक या कंसल्टेंट के मौजूदा पंजीकरण की वैधता समाप्त होने तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद दोबारा पंजीकरण कराना होगा।
नई व्यवस्था से क्या बदला?
| पहले की व्यवस्था | नई व्यवस्था |
|---|---|
| हर रेलवे जोन में अलग पंजीकरण जरूरी | किसी एक जोन में पंजीकरण पर्याप्त |
| ज्यादा कागजी कार्रवाई | प्रक्रिया हुई सरल |
| समय और लागत अधिक | समय और खर्च दोनों में बचत |
| अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर | एकीकृत व्यवस्था लागू |
दूसरे जोन में काम शुरू करने से पहले पूरी करनी होगी औपचारिकता
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कंसल्टेंट ऐसे जोन में काम के लिए चुना जाता है, जहां वह पहले से पंजीकृत नहीं है, तो उसे परियोजना शुरू होने या आधिकारिक समझौते (एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर करने से पहले उस संबंधित जोन में औपचारिक रूप से अपना नाम दर्ज कराना होगा। हालांकि, इसके लिए दोबारा पूरी पंजीकरण प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी।
औद्योगिक रेल कनेक्टिविटी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस फैसले से निजी फैक्ट्रियों, गोदामों और औद्योगिक इकाइयों तक रेल नेटवर्क पहुंचाने वाली प्राइवेट साइडिंग परियोजनाओं को तेजी मिलेगी। कागजी प्रक्रिया कम होने से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में लगने वाला समय भी घटेगा। रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
देशभर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिलेगा बढ़ावा
रेलवे के इस कदम से न केवल कंसल्टेंट्स को राहत मिलेगी, बल्कि औद्योगिक विकास और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी फायदा होगा। इससे रेल आधारित माल परिवहन को मजबूती मिलने और देश के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक कनेक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद है।