पिछले वर्ष 3 से 5 दिसंबर के बीच देशभर में इंडिगो की उड़ानों में आई व्यापक अव्यवस्था ने यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना कराया। जांच के बाद DGCA ने इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन अब यह साफ हो रहा है कि मामला सिर्फ एयरलाइन की लापरवाही तक सीमित नहीं है। इस प्रकरण ने यह भी उजागर किया कि नियामक तंत्र की निगरानी और पूर्व तैयारी में भी गंभीर खामियां रह सकती हैं।
DGCA के आंतरिक सिस्टम की होगी समीक्षा
नागर विमानन मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए DGCA के इंटरनल सिस्टम की जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच का उद्देश्य यह समझना है कि नियमों के क्रियान्वयन, निगरानी प्रक्रिया और जोखिम मूल्यांकन में कहां चूक हुई। मंत्रालय यह जानना चाहता है कि क्या DGCA ने समय रहते संभावित संकट के संकेतों को नजरअंदाज किया।
FTL नियमों पर देरी बनी विवाद की जड़
सूत्रों के अनुसार DGCA ने इंडिगो को फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FTL) के नए नियम लागू करने के लिए 10 फरवरी तक की अस्थायी राहत दी थी। 11 फरवरी से इन नियमों को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना है। सवाल यह उठ रहा है कि जब 1 नवंबर से FTL नियमों का दूसरा चरण लागू होना था, तब यह पहले ही क्यों नहीं जांचा गया कि एयरलाइनों के पास पर्याप्त पायलट और संसाधन हैं या नहीं।
DGCA के भीतर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले को लेकर DGCA के अंदर भी असहजता देखी जा रही है। कुछ अधिकारी मानते हैं कि नियामक संस्था को सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नीतिगत तैयारी और समयबद्ध ऑडिट पर भी उतना ही जोर देना चाहिए। अगर नियामक पहले ही स्थिति का आकलन कर लेता, तो संभव है कि इतने बड़े स्तर पर उड़ानें बाधित न होतीं।
इंडिगो की प्रतिक्रिया और आगे की चुनौती
DGCA के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए इंडिगो ने कहा है कि वह जुर्माने को संज्ञान में लेकर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइन के लिए असली चुनौती अब नए FTL नियमों के तहत सुचारु संचालन सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही DGCA के लिए भी यह आत्ममंथन का समय है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से कैसे बचा जाए।
विमानन नियमन पर बड़ा प्रश्नचिह्न
यह मामला केवल एक एयरलाइन या एक नियामक संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि एयरलाइंस और नियामक दोनों ही अपनी जिम्मेदारियों को समय रहते समझें और लागू करें।
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