रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। जयशंकर ने इस मुलाकात पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा की।जयशंकर की यूक्रेन यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री से भी हुई द्विपक्षीय बातचीत
जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा के साथ भी विस्तृत बातचीत की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने को लेकर गंभीर चर्चा हुई।बैठक का एक प्रमुख मुद्दा रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष रहा। दोनों पक्षों के बीच युद्ध को समाप्त करने के संभावित तरीकों और विकल्पों पर बातचीत की गई।
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद को तैयार भारत
विदेश मंत्री जयशंकर ने एक बार फिर भारत के रुख को सामने रखते हुए कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म करने के प्रयासों में भारत किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार है।भारत की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि अगर जरूरत पड़ती है तो वह मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। फरवरी 2022 से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए भारत लगातार बातचीत और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
ब्लैक सी में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा पर भी चर्चा
जयशंकर और यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा के बीच बातचीत केवल युद्ध समाप्त करने तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं ने ब्लैक सी में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों के मुद्दे पर भी गंभीर चर्चा की।ब्लैक सी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा रूस-यूक्रेन संघर्ष के व्यापक प्रभावों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में इस विषय को द्विपक्षीय बातचीत में शामिल किया जाना समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
भारत-यूक्रेन संबंधों को मजबूत करने पर जोर
जयशंकर की यात्रा के दौरान भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच संवाद ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन में युद्ध जारी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके समाधान के लिए विभिन्न कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं।भारत ने अपनी ओर से बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों में सहयोग की इच्छा जाहिर की है। जयशंकर की जेलेंस्की और सिबिहा से मुलाकात इसी कूटनीतिक संवाद का हिस्सा रही।