नई दिल्ली. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर देश के विभिन्न हिस्सों में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शांति वन पहुंचकर अपने परदादा और स्वतंत्र भारत के प्रमुख शिल्पकारों में से एक पंडित नेहरू को नमन किया। उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित कर मौन श्रद्धांजलि दी और उनके जीवन तथा विचारों को स्मरण करते हुए देशवासियों के प्रति उनका संदेश साझा किया। इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे।
राहुल गांधी ने बताया आधुनिक भारत का निर्माता
राहुल गांधी ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में पंडित नेहरू को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखी और अपना संपूर्ण जीवन एक समावेशी, सौहार्दपूर्ण तथा प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। राहुल गांधी ने इस बात पर बल दिया कि नेहरू का दृष्टिकोण केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि वह ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते थे जहां लोकतंत्र, समान अवसर, सामाजिक न्याय और वैज्ञानिक सोच समाज की आधारशिला बने।
लोकतांत्रिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टि के पक्षधर थे नेहरू
पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम भारतीय लोकतंत्र के विकास और संवैधानिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश अनेक चुनौतियों से जूझ रहा था, लेकिन नेहरू ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने और संवैधानिक संस्थानों को स्थायित्व प्रदान करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान को राष्ट्रीय विकास का आधार माना। उनके नेतृत्व में देश में वैज्ञानिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहलें शुरू की गईं, जिनका प्रभाव आज भी दिखाई देता है।
शांति वन में जुटे वरिष्ठ नेता
पुण्यतिथि के अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में स्थित शांति वन में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने वहां पहुंचकर पंडित नेहरू को श्रद्धासुमन अर्पित किए। नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत की विकास यात्रा में नेहरू की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और सामाजिक समरसता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को विशेष रूप से स्मरण किया गया।
प्रधानमंत्री ने भी किया स्मरण
पंडित नेहरू की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सामाजिक माध्यम के जरिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। यह अवसर भारतीय राजनीति के उस अध्याय को स्मरण करने का भी रहा जिसने स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आधुनिक विकास मॉडल की रखी आधारशिला
पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत ने योजनाबद्ध विकास का मार्ग अपनाया। उनके कार्यकाल में बड़े बांधों, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों और आधारभूत संरचना परियोजनाओं को राष्ट्रीय प्रगति का माध्यम माना गया। उन्होंने औद्योगिकीकरण को आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रमुख आधार बताया और देश में आधुनिक उत्पादन क्षमता विकसित करने के लिए अनेक नीतिगत कदम उठाए। यही कारण है कि उन्हें आधुनिक भारत के निर्माणकर्ताओं में प्रमुख स्थान दिया जाता है।
शिक्षा और विज्ञान को दी नई दिशा
नेहरू का मानना था कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी शिक्षा और वैज्ञानिक क्षमता में निहित होती है। उनके कार्यकाल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और अनेक राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों की स्थापना की गई। उच्च शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने वाली इन संस्थाओं ने आने वाले दशकों में भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतरिक्ष कार्यक्रम और परमाणु ऊर्जा अनुसंधान की प्रारंभिक नींव भी इसी दौर में रखी गई थी।
आज भी प्रासंगिक है नेहरू का दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, वैज्ञानिक चिंतन और सामाजिक न्याय जैसे सिद्धांत आज भी भारतीय समाज और शासन व्यवस्था के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने स्वतंत्रता के बाद थे। पंडित नेहरू ने जिस आधुनिक, प्रगतिशील और समावेशी भारत की कल्पना की थी, वह आज भी सार्वजनिक विमर्श और राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बना हुआ है।
राष्ट्र निर्माण की प्रेरक विरासत
27 मई 1964 को पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ था, लेकिन उनकी विरासत आज भी भारतीय लोकतंत्र, शिक्षा व्यवस्था, वैज्ञानिक प्रगति और संस्थागत विकास के रूप में जीवित है। उनकी पुण्यतिथि केवल एक महान नेता को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन मूल्यों और आदर्शों को पुनः याद करने का भी दिन है जिन्होंने स्वतंत्र भारत को एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।