पटना - बिहार में आरक्षण व्यवस्था को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने और अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण (सब-कोटा) लागू करने की खुलकर वकालत की है। उनका कहना है कि आरक्षण का लाभ समाज के सभी जरूरतमंद वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।
अनुसूचित जातियों के लिए सब-कोटा लागू किया जाना चाहिए
मांझी के मुताबिक, आरक्षित वर्गों में कुछ परिवार और जातियां सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से आगे बढ़ चुकी हैं। वहीं, कई बेहद वंचित तबके अब भी शिक्षा और अवसरों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में आरक्षण के लाभ का अधिक न्यायपूर्ण वितरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप बिहार में अनुसूचित जातियों के लिए सब-कोटा लागू किया जाना चाहिए, ताकि आरक्षण का लाभ उन वर्गों तक भी पहुंचे जो अब तक अपेक्षाकृत पीछे रह गए हैं।
चिराग पासवान के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
मांझी का यह बयान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की आरक्षण को लेकर की गई टिप्पणी के बाद आया है। दोनों नेताओं के रुख को देखते हुए बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
मांझी का तर्क है कि आरक्षण का उद्देश्य उन लोगों को अवसर देना है जिन्हें ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से पीछे रहना पड़ा है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि मौजूदा व्यवस्था में वास्तव में सबसे वंचित लोगों तक इसका लाभ कितना पहुंच रहा है।
हालांकि, आरक्षण में उप-वर्गीकरण का मुद्दा कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील है। बिहार में इसे लागू करने को लेकर आगे सरकार और राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज होने की संभावना है।