मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मान्यता दे दी है। लोकसभा सचिवालय की मंजूरी के बाद अब लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों की संख्या घटकर 3 रह गई है।
पिछले महीने शिंदे गुट में शामिल हुए थे छह सांसद
बीते महीने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट में शामिल हुए थे। महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर' के नाम से जाना गया। अब लोकसभा स्पीकर की मंजूरी मिलने के बाद इन सांसदों का विलय औपचारिक रूप से मान्य हो गया है।
शिवसेना (यूबीटी) ने फैसले पर जताई नाराजगी
लोकसभा स्पीकर के फैसले पर शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 से उनकी पार्टी को लगातार कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह छीना गया और अब छह सांसदों के विलय को भी मंजूरी दे दी गई।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा स्पीकर ने दोनों पक्षों को पूरी तरह सुने बिना फैसला सुनाया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
ये छह सांसद हुए शिंदे गुट में शामिल
लोकसभा सचिवालय से मान्यता मिलने वाले छह सांसदों में शामिल हैं—
ओमप्रकाश भूपाल सिंह (ओमराजे) निंबालकर – धाराशिव (उस्मानाबाद)
नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर – हिंगोली
संजय उत्तमराव देशमुख – यवतमाल-वाशिम
संजय हरिभाऊ जाधव – परभणी
संजय दीना पाटिल – मुंबई उत्तर-पूर्व
भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे – शिरडी
लोकसभा में बदला शिवसेना का समीकरण
इस घटनाक्रम के बाद लोकसभा में एकनाथ शिंदे गुट की ताकत बढ़कर 13 सांसद हो गई है। वहीं, उद्धव ठाकरे गुट के पास अब केवल 3 सांसद बचे हैं। इनमें अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण मध्य) और राजभाऊ वाजे (नासिक) शामिल हैं।
लोकसभा स्पीकर के इस फैसले को महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे शिवसेना के दोनों गुटों के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है।