राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने बीते शुक्रवार को साफ-साफ शब्दों में कहा कि, संघ कोई अर्धसैनिक (पैरामिलिट्री) संगठन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने आगे अपने संबोधन में कहा कि संघ की वर्दी, शाखाओं में होने वाले शारीरिक अभ्यास और दंड संचालन को देखकर उसे पैरामिलिट्री संगठन समझना एक बड़ी गलतफहमी है।
RSS देशभक्ति, अनुशासन और समाज सेवा का भाव सिखाती हैं
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को संगठित करने और उसमें आवश्यक गुण व सद्गुण विकसित करने का कार्य करता है, ताकि भारत दोबारा किसी विदेशी शक्ति के अधीन न जाए। इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि संघ की शाखाएं देशभक्ति, अनुशासन और समाज सेवा का भाव सिखाती हैं।
RSS एक अनूठा संगठन है, जिसे समझना आसान नहीं है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख ने संघ के खिलाफ बनाए जा रहे कथित नकारात्मक नैरेटिव पर भी सवाल उठाए। मोहन भागवत ने कहा कि आजकल लोग गहराई से सच्चाई जानने के बजाय सतही स्रोतों पर भरोसा कर लेते हैं, जिससे संघ को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलती हैं। भागवत ने कहा कि RSS एक अनूठा संगठन है, जिसे समझना आसान नहीं है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना और मजबूत बनाना है।
आज़ादी की स्थायी गारंटी क्या है और ऐसा बार-बार क्यों हुआ?
वहीं आगे इतिहास का उल्लेख करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अंग्रेज भारत पर आक्रमण करने वाले पहले विदेशी नहीं थे। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार ऐसा हुआ कि दूर-दराज से आए, भारत से कम समृद्ध और कम शक्तिशाली लोग यहां आकर शासन करने में सफल रहे। भागवत ने कहा, ऐसा सात बार हुआ और अंग्रेज आठवें आक्रांता थे। सवाल यह है कि आज़ादी की स्थायी गारंटी क्या है और ऐसा बार-बार क्यों हुआ?
संघ किसी के विरोध में नहीं बना है - मोहन भागवत
उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि RSS को अक्सर किसी प्रतिक्रिया या विरोध में बना संगठन बताया जाता है, जबकि यह धारणा पूरी तरह गलत है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख ने स्पष्ट किया कि संघ न तो किसी के विरोध में बना है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा करता है। संघ का उद्देश्य केवल समाज को एकजुट करना और उसमें नैतिक, सामाजिक व चारित्रिक मूल्यों को मजबूत करना है।
मोहन भागवत ने समाज से आत्ममंथन का आह्वान किया
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने समाज से आत्ममंथन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब समाज स्वार्थ से ऊपर उठकर एकजुट होगा और उसमें गुण व सद्गुण विकसित होंगे, तभी देश का भविष्य सही मायनों में सुरक्षित और सशक्त बन पाएगा।
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