जैसलमेर - भारत की सैन्य ताकत को आधुनिक बनाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बदलते वैश्विक हालात और युद्ध की नई तकनीकों को देखते हुए भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी दिशा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश का कुल रक्षा बजट बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें आधुनिक हथियारों, सैन्य उपकरणों और नई तकनीकों की खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य केवल विदेशों से अत्याधुनिक हथियार खरीदना नहीं, बल्कि देश में ही रक्षा तकनीक विकसित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने का मजबूत ढांचा तैयार करना है।
जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की बैठक में बोले राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और तकनीक अब सैन्य अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
उन्होंने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) लगातार नई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। आधुनिक हथियारों, मिसाइलों और रक्षा प्रणालियों के विकास के साथ उनके परीक्षण भी किए जा रहे हैं। सरकार ने रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों को भी अवसर उपलब्ध कराए हैं, ताकि सरकारी संस्थानों के साथ निजी उद्योग भी देश की सैन्य जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे सकें।
तीनों सेनाओं में हो रहे हैं बड़े बदलाव
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना अपनी सैन्य संरचनाओं और कार्यप्रणाली में लगातार बदलाव कर रही हैं। इन बदलावों का उद्देश्य आधुनिक युद्ध की परिस्थितियों के अनुरूप सेनाओं को तैयार करना है।
उन्होंने भारतीय सेना की असनी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून जैसी नई सैन्य टुकड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये बदलती परिचालन जरूरतों के हिसाब से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि एमएसएमई से लेकर देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियां तक अब रक्षा उत्पादन और तकनीकी विकास में भागीदारी कर रही हैं।
रक्षा बजट में आधुनिकीकरण के लिए ₹2.19 लाख करोड़
रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का कुल रक्षा बजट 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें से 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपये सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण और खरीद के लिए निर्धारित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक हथियारों, उपकरणों और तकनीकों की उपलब्धता के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जरूरी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार पिछले वर्षों से आधुनिकीकरण के बजट में लगातार बढ़ोतरी कर रही है।
राजनाथ सिंह के अनुसार, तीनों सेनाएं अपनी जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर बजट का उपयोग करती हैं। सरकार का प्रयास है कि सैन्य बलों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ रक्षा खरीद में भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ाई जाए।
10 साल में रक्षा उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 में भारत का रक्षा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
इसी तरह रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में भारत का रक्षा निर्यात 2,000 करोड़ रुपये से भी कम था, जबकि अब यह लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी दी गई है।
सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए भी बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकारी और निजी कंपनियों की साझेदारी पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे देश को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने इसे 'होल ऑफ द नेशन अप्रोच' बताया।
उन्होंने निजी कंपनियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि अब उन्हें सरकारी कार्यक्रमों के साथ निजी क्षेत्र के आयोजनों में भी शामिल होने का अवसर मिलता है। वहां हो रहे काम और नई तकनीकों को देखकर उन्हें गर्व महसूस होता है।
विदेशी निर्भरता कम करना सरकार का लक्ष्य
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की रणनीति केवल आधुनिक हथियार हासिल करने तक सीमित नहीं है। सरकार ऐसा रक्षा तंत्र विकसित करना चाहती है, जिसमें सेना की जरूरतों के अनुसार देश में ही तकनीक तैयार हो, भारतीय उद्योग को अधिक अवसर मिलें और महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो।
कुल मिलाकर, रक्षा बजट में बढ़ोतरी, स्वदेशी हथियारों का विकास, निजी क्षेत्र की भागीदारी और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना भारत की रक्षा नीति के प्रमुख पहलू बनकर सामने आए हैं। आने वाले वर्षों में इन लक्ष्यों की प्रगति से यह तय होगा कि भारत अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता और वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी हिस्सेदारी को किस स्तर तक बढ़ा पाता है।