काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा से लगे रसुवा जिले में भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण सड़क, पुल और संचार व्यवस्था प्रभावित होने से बड़ी संख्या में लोग दुर्गम इलाकों में फंस गए हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, नेपाल में कम से कम 290 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों और सीमा क्षेत्र में मौजूद पर्यटकों की है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
अलग-अलग राज्यों के तीर्थयात्री और पर्यटक प्रभावित
बाढ़ के बाद कई राज्यों से नेपाल पहुंचे भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
- तमिलनाडु और पुडुचेरी: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 83 और पुडुचेरी के 3 नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। वहीं, 21 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालकर तिमुरे बेस कैंप पहुंचाया गया है।
- पश्चिम बंगाल: कोलकाता की एक ट्रैवल एजेंसी के जरिए कैलाश यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल भी संपर्क से बाहर है। दल में 30 पर्यटक और 2 स्टाफ सदस्य शामिल बताए गए हैं।
- गुजरात: राज्य के 17 पर्यटकों और एनआरआई से संपर्क नहीं हो पाया है।
- महाराष्ट्र: नागपुर और महाराष्ट्र के 106 पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और उन्हें बिहार के दानापुर भेजा गया है।
- अन्य राज्य: केरल के 33, कर्नाटक के 13, आंध्र प्रदेश के 7, ओडिशा के 3 और छत्तीसगढ़ की एक महिला के भी संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी गई है।
- ईशा फाउंडेशन: संस्था के 77 श्रद्धालु तिब्बत के ग्यारोंग क्षेत्र में सुरक्षित बताए गए हैं, जबकि नेपाल के तिमुरे में मौजूद तीन स्वयंसेवकों की तलाश जारी है।
भारत ने तेज किया राहत और बचाव अभियान
नेपाल में गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने राहत और बचाव प्रयासों को तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत कर भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। भारतीय वायुसेना के C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान के जरिए काठमांडू में 10 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी गई है। इसमें आवश्यक दवाएं, टेंट, कंबल और सोलर लैंप समेत अन्य आपातकालीन सामान शामिल हैं। इसके अलावा C-17 और अन्य परिवहन विमान अतिरिक्त राहत सामग्री पहुंचाने तथा जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों को एयरलिफ्ट करने के लिए तैयार रखे गए हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने स्थानीय प्रशासन और नेपाली सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए आपातकालीन सहायता व्यवस्था भी सक्रिय की है।
रसुवागढ़ी और आसपास के इलाकों में भारी तबाही
बाढ़ का सबसे गंभीर असर रसुवागढ़ी, तिमुरे और स्याप्रुबेसी जैसे इलाकों में देखा गया है। कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी संपर्क टूट गया है। प्रारंभिक जांच में भूस्खलन और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पानी का प्रवाह बाधित होने के बाद अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया, जिससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल हेलीकॉप्टरों की मदद ले रहे हैं। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण बचाव अभियान में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
बिहार और उत्तर प्रदेश में भी सतर्कता
नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए भारत में भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। गंडक और कोशी नदी से जुड़े निचले इलाकों पर नजर रखी जा रही है। बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों की तैनाती की तैयारी की जा रही है।फिलहाल प्राथमिकता नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों का पता लगाने, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने की है।