नई दिल्ली. साउथ एशियन रिपोर्टर ऑन एनवायरनमेंट लॉ ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण की पांच बेंचों द्वारा जनवरी से जून 2026 के बीच तय की गई 119 अपीलों का आकलन किया। इसमें पाया गया कि पर्यावरण या जनहित पक्ष की सफलता दर छह महीनों में शून्य प्रतिशत रही। उद्योग, परियोजना प्रस्तावक और संपत्ति मालिकों की सफलता दर 58.8 प्रतिशत रही। कुल 119 अपीलों में पर्यावरण न्याय या जनहित पक्ष ने मेरिट पर आधारित 16 अपीलों में से कोई भी नहीं जीती। दूसरी ओर परियोजना प्रस्तावक, उद्योग और संपत्ति मालिक पक्ष ने 51 में से 30 अपीलें जीतीं।
प्रक्रियात्मक आधार पर निपटारे का बड़ा हिस्सा
आकलन में पाया गया कि मामलों का एक बड़ा हिस्सा मेरिट स्टेज तक नहीं पहुंचा। 119 अपीलों में से 52 को प्रक्रियात्मक आधारों पर निपटाया गया जिसमें सीमा, अधिकार क्षेत्र, पोषणीयता या वापसी शामिल है। इसका मतलब 67 मामले मेरिट पर तय हुए। लगभग 44 प्रतिशत अपीलें सीमा, अधिकार क्षेत्र, पोषणीयता या वापसी के आधार पर बिना किसी मेरिट फैसले के खारिज कर दी गईं। मेरिट पर तय हुए 67 फैसलों में पर्यावरण या जनहित पक्ष की सभी 16 अपीलें असफल रहीं। उद्योग पक्ष ने 51 मेरिट अपीलों में से 30 में अनुकूल आदेश हासिल किए।
विभिन्न बेंचों में समान पैटर्न
यह पैटर्न सभी बेंचों में लगातार देखा गया। पश्चिमी क्षेत्र बेंच में नौ पर्यावरण या जनहित अपीलें मेरिट पर तय हुईं और सभी खारिज कर दी गईं। उद्योग, प्रस्तावक और संपत्ति मालिकों ने 24 मामलों में से 15 में अनुकूल आदेश हासिल किए। केंद्रीय क्षेत्र बेंच के समक्ष तीन पर्यावरण अपीलों में से कोई भी सफल नहीं हुई। पांच उद्योग अपीलों में से एक को अनुकूल आदेश मिला। प्रिंसिपल बेंच ने दोनों पर्यावरण अपीलें खारिज कर दीं। दस उद्योग अपीलों में से पांच अनुकूल रहीं और तीन में यथास्थिति बनाए रखी गई।
पर्यावरण पक्ष की चुनौतियां
रिपोर्ट से साफ है कि पर्यावरण और जनहित पक्ष को मेरिट पर सफलता हासिल करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। प्रक्रियात्मक बाधाएं भी बड़ी संख्या में मामलों को मेरिट तक पहुंचने से रोक रही हैं। सभी बेंचों में समान रुझान दिखने से यह चिंता बढ़ी है कि पर्यावरणीय न्याय की राह आसान नहीं है। उद्योग और परियोजना प्रस्तावक पक्ष अपेक्षाकृत बेहतर सफलता दर हासिल कर रहा है। यह आंकड़ा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुकदमों की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है।
आगे की निगरानी और महत्व
यह आकलन दक्षिण एशिया में अदालती फैसलों को ट्रैक करने वाले डेटाबेस पर आधारित है। छह महीने की अवधि में शून्य सफलता दर पर्यावरण संगठनों और जनहित याचिकाकर्ताओं के लिए चिंता का विषय है। प्रक्रियात्मक निपटारे की उच्च दर भी ध्यान देने योग्य है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण पर्यावरणीय मुद्दों के लिए महत्वपूर्ण मंच है इसलिए इन आंकड़ों पर आगे चर्चा और निगरानी की जरूरत है। रिपोर्ट नीति और प्रक्रिया सुधार की दिशा में सोचने के लिए आधार प्रदान करती है।